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Kangra News: फॉल आर्मी वर्म से बचाव के लिए किया निरीक्षण
Sat, 11 Jul 2026 12:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 11 Jul 2026 12:56 AM IST
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देहरा के पासा गांव में मक्की की फसल में कीड़ा लगने से खराब होती फशलस्रोत : जागरूक पाठक
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धर्मशाला/फतेहपुर (कांगड़ा)। मक्की की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले फॉल आर्मी वर्म की रोकथाम के लिए कृषि विभाग ने जिले में निगरानी और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने विकास खंड फतेहपुर के धमेटा, हड़वाल, छबर और स्थाना गांवों में निरीक्षण किया। टीम ने कीट की स्थिति का आकलन किया और किसानों को समय रहते इसकी पहचान व वैज्ञानिक प्रबंधन के उपाय बताए।
निरीक्षण दल में कीट विज्ञान की वैज्ञानिक डॉ. अंजना ठाकुर, राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर से कृषि विकास अधिकारी डॉ. रीता ठाकुर, कृषि प्रसार अधिकारी डॉ. इंदु राणा और विकास खंड फतेहपुर के कृषि विकास अधिकारी डॉ. प्रवीन शामिल रहे। डॉ. अंजना ठाकुर ने बताया कि फॉल आर्मी वर्म के शुरुआती प्रकोप में पत्तियों पर सुई जितने छोटे छेद दिखाई देते हैं जो बाद में बड़े और अनियमित सुराखों में बदल जाते हैं।
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ये उपाय करें
यदि खेत में कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो प्रति लीटर पानी में पांच मिली नीम आधारित कीटनाशी का छिड़काव करें। 10 प्रतिशत से अधिक होने पर एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी (0.4 ग्राम प्रति लीटर) या क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी (कोराजन) 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। छिड़काव के दौरान नोजल को पत्ती गोभ की ओर रखें और कीटग्रस्त पौधों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें। फूल आने की अवस्था से लेकर कटाई तक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने की सलाह भी दी गई। डॉ. प्रवीन ने बताया कि विभाग की ओर से अनुमोदित दरों पर कोराजन (क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी) सहित प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने प्रमाणित उत्पादों के उपयोग, नियमित फसल निरीक्षण, फसल चक्र अपनाने, गहरी जुताई करने और फसल अवशेष नष्ट करने जैसे उपाय अपनाने की अपील की।
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निरीक्षण दल में कीट विज्ञान की वैज्ञानिक डॉ. अंजना ठाकुर, राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर से कृषि विकास अधिकारी डॉ. रीता ठाकुर, कृषि प्रसार अधिकारी डॉ. इंदु राणा और विकास खंड फतेहपुर के कृषि विकास अधिकारी डॉ. प्रवीन शामिल रहे। डॉ. अंजना ठाकुर ने बताया कि फॉल आर्मी वर्म के शुरुआती प्रकोप में पत्तियों पर सुई जितने छोटे छेद दिखाई देते हैं जो बाद में बड़े और अनियमित सुराखों में बदल जाते हैं।
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ये उपाय करें
यदि खेत में कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो प्रति लीटर पानी में पांच मिली नीम आधारित कीटनाशी का छिड़काव करें। 10 प्रतिशत से अधिक होने पर एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी (0.4 ग्राम प्रति लीटर) या क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी (कोराजन) 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। छिड़काव के दौरान नोजल को पत्ती गोभ की ओर रखें और कीटग्रस्त पौधों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें। फूल आने की अवस्था से लेकर कटाई तक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने की सलाह भी दी गई। डॉ. प्रवीन ने बताया कि विभाग की ओर से अनुमोदित दरों पर कोराजन (क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी) सहित प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने प्रमाणित उत्पादों के उपयोग, नियमित फसल निरीक्षण, फसल चक्र अपनाने, गहरी जुताई करने और फसल अवशेष नष्ट करने जैसे उपाय अपनाने की अपील की।
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