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Kangra News: जंक फूड, मोबाइल-टीवी बढ़ा रहे बच्चों में मोटापा
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डा. अतुल गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। हिमाचली बच्चों में बढ़ता मोटापा चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जंक फूड, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, शारीरिक गतिविधियों में कमी और मोबाइल-टीवी पर बढ़ता समय बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाल रोग विभाग में बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि पहले पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चे स्कूल और अन्य कार्यों के लिए पैदल चलते थे जिससे उनका शरीर सक्रिय रहता था। अब बदलती जीवनशैली के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां लगातार घट रही हैं।
जंक फूड, प्रोसेस्ड स्नैक्स, मीठे पेय, पैकेट वाले जूस, चॉकलेट और टॉफियां बच्चों के भोजन का नियमित हिस्सा बनते जा रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा हो, वह बार-बार चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक या पैकेट वाले स्नैक्स की मांग करता हो, खेलकूद से दूरी बना रहा हो या मोबाइल और टीवी पर अधिक समय बिताता हो तो इसे नजरअंदाज न करें। गर्दन या बगल में काले मखमली धब्बे दिखाई देना इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। बिना कारण वजन बढ़ने पर थायरॉयड जांच भी करानी चाहिए।
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रोगों को बुलावा है मोटापा
बचपन का मोटापा केवल दिखने की समस्या नहीं है। समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर, हार्मोन संबंधी समस्याएं, जोड़ों के रोग, नींद संबंधी विकार और कम उम्र में हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
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बच्चों को दें घर का बना खाना
वर्ष 2022 में टांडा में शुरू किए गए पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में अब तक मोटापे और अधिक वजन से ग्रसित करीब 300 बच्चे पंजीकृत हैं। अधिकांश बच्चों का उपचार संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सुधार के जरिए सफलतापूर्वक किया जा रहा है। बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट खेलकूद या शारीरिक गतिविधि के लिए प्रेरित करें। घर का ताजा और संतुलित भोजन दें। जंक फूड और मीठे पेय से दूरी रखें। मोबाइल और टीवी का समय सीमित करें। डॉ. अतुल गुप्ता, बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज टांडा
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धर्मशाला। हिमाचली बच्चों में बढ़ता मोटापा चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जंक फूड, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, शारीरिक गतिविधियों में कमी और मोबाइल-टीवी पर बढ़ता समय बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाल रोग विभाग में बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि पहले पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चे स्कूल और अन्य कार्यों के लिए पैदल चलते थे जिससे उनका शरीर सक्रिय रहता था। अब बदलती जीवनशैली के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां लगातार घट रही हैं।
जंक फूड, प्रोसेस्ड स्नैक्स, मीठे पेय, पैकेट वाले जूस, चॉकलेट और टॉफियां बच्चों के भोजन का नियमित हिस्सा बनते जा रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा हो, वह बार-बार चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक या पैकेट वाले स्नैक्स की मांग करता हो, खेलकूद से दूरी बना रहा हो या मोबाइल और टीवी पर अधिक समय बिताता हो तो इसे नजरअंदाज न करें। गर्दन या बगल में काले मखमली धब्बे दिखाई देना इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। बिना कारण वजन बढ़ने पर थायरॉयड जांच भी करानी चाहिए।
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रोगों को बुलावा है मोटापा
बचपन का मोटापा केवल दिखने की समस्या नहीं है। समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर, हार्मोन संबंधी समस्याएं, जोड़ों के रोग, नींद संबंधी विकार और कम उम्र में हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
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बच्चों को दें घर का बना खाना
वर्ष 2022 में टांडा में शुरू किए गए पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लीनिक में अब तक मोटापे और अधिक वजन से ग्रसित करीब 300 बच्चे पंजीकृत हैं। अधिकांश बच्चों का उपचार संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सुधार के जरिए सफलतापूर्वक किया जा रहा है। बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट खेलकूद या शारीरिक गतिविधि के लिए प्रेरित करें। घर का ताजा और संतुलित भोजन दें। जंक फूड और मीठे पेय से दूरी रखें। मोबाइल और टीवी का समय सीमित करें। डॉ. अतुल गुप्ता, बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज टांडा

डा. अतुल गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ

डा. अतुल गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ