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Kangra News: कंगेहण पेयजल योजना से घरों में पहुंच रहा मटमैला पानी
Tue, 30 Jun 2026 01:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 30 Jun 2026 01:44 AM IST
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सोल वनेहड़, लडूट, जगनी, मनियाड समेत आसपास के कई गांवों में नलों में आया मटमैला पानी। संवाद
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लंबागांव (कांगड़ा)। कंगेहण पेयजल योजना की जलापूर्ति पर लोगों ने सवाल उठाए हैं। सोमवार को सोल वनेहड़, लडूट, जगनी, मनियाड सहित आसपास के कई गांवों में मटमैला पानी पहुंचा। इससे ग्रामीणों में रोष है।
ग्रामीण भागीरथ, कांता देवी, सतपाल चौहान, शुभम चौहान, भगवन शर्मा, ओम प्रकाश, विकास राणा और विजय कंठबाल ने कहा कि प्रदेश सरकार और जल शक्ति विभाग स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के दावे करते हैं लेकिन बारिश में व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है। मटमैले पानी के सेवन से जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
यदि अभी यह स्थिति है तो भविष्य में समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित गांवों में पानी की आपूर्ति प्रदेश की प्रमुख कंगेहण पेयजल योजना से होती है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस योजना के बावजूद लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है।
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उधर, जल शक्ति विभाग लंबागांव के कनिष्ठ अभियंता रवि शर्मा ने बताया कि कंगेहण पेयजल योजना दूसरे कनिष्ठ अभियंता के कार्यक्षेत्र में आती है और वही इस संबंध में जानकारी दे सकते हैं। हालांकि जिन गांवों से मटमैले पानी की शिकायतें सामने आई हैं वे उनके ही कार्यक्षेत्र में आते हैं।
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ग्रामीण भागीरथ, कांता देवी, सतपाल चौहान, शुभम चौहान, भगवन शर्मा, ओम प्रकाश, विकास राणा और विजय कंठबाल ने कहा कि प्रदेश सरकार और जल शक्ति विभाग स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के दावे करते हैं लेकिन बारिश में व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है। मटमैले पानी के सेवन से जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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यदि अभी यह स्थिति है तो भविष्य में समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित गांवों में पानी की आपूर्ति प्रदेश की प्रमुख कंगेहण पेयजल योजना से होती है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस योजना के बावजूद लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है।
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उधर, जल शक्ति विभाग लंबागांव के कनिष्ठ अभियंता रवि शर्मा ने बताया कि कंगेहण पेयजल योजना दूसरे कनिष्ठ अभियंता के कार्यक्षेत्र में आती है और वही इस संबंध में जानकारी दे सकते हैं। हालांकि जिन गांवों से मटमैले पानी की शिकायतें सामने आई हैं वे उनके ही कार्यक्षेत्र में आते हैं।