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Kangra News: डॉक्टर बिना पीएचसी, कैसे सुधरेगी ग्रामीणों की सेहत
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 30 Jan 2026 06:02 AM IST
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चार पीएचसी डॉक्टर विहीन, नूरपुर में चरमराई ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था
रितेश महाजन
नूरपुर (कांगड़ा)। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावे नूरपुर स्वास्थ्य खंड में खोखले साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य खंड के तहत आने वाली चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी)सदवां, रिन्ना, टीका नगरोटा और बासा बजीरा में चिकित्सकों के पद रिक्त होने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को मजबूरी में नूरपुर अस्पताल या निजी स्वास्थ्य संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है।
विभागीय जानकारी के अनुसार नूरपुर स्वास्थ्य खंड में कुल नौ पीएचसी हैं, जिनमें उपरोक्त चार पीएचसी में तैनात मेडिकल ऑफिसरों का चयन एमडी पाठ्यक्रम के लिए होने के बाद पद रिक्त हो गए हैं। डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर इन स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर हजारों ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
नूरपुर–चंबा सड़क मार्ग पर स्थित पीएचसी सदवां क्षेत्र की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य इकाई मानी जाती है, जहां डॉक्टर की तैनाती के दौरान रोजाना 60 से 70 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते थे। वहीं, रिन्ना और टीका नगरोटा पीएचसी में प्रतिदिन 15 से 20 तथा बासा बजीरा पीएचसी में 20 से 25 मरीज इलाज के लिए आते थे। चिकित्सकों के पद रिक्त होने के बाद मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सदवां पीएचसी में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां फार्मासिस्ट के अलावा महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद भी रिक्त पड़े हैं। इस पीएचसी के अंतर्गत सात स्वास्थ्य उपकेंद्र कार्यरत हैं, लेकिन मेडिकल ऑफिसर के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
सदवां ग्राम पंचायत के प्रधान पवन कुमार ने सरकार से पीएचसी में तत्काल डॉक्टर की तैनाती की मांग की है। उन्होंने कहा कि या तो नियमित डॉक्टर नियुक्त किया जाए या अस्थायी तौर पर डेपुटेशन पर चिकित्सक भेजा जाए, ताकि लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।
उधर, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिलबर सिंह ने बताया कि सदवां, रिन्ना, टीका नगरोटा और बासा बजीरा पीएचसी में मेडिकल ऑफिसरों के एमडी चयन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और उम्मीद है कि सरकार व विभाग जल्द ही समाधान निकालेगा। संवाद
टीकाकरण और राष्ट्रीय कार्यक्रम भी प्रभावित
पीएचसी सदवां में इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ई-वीआईएन) की सुविधा भी उपलब्ध है, जो बच्चों के टीकाकरण में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन मेडिकल ऑफिसर की अनुपस्थिति के कारण न केवल ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि टीकाकरण और टीबी उन्मूलन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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विभागीय जानकारी के अनुसार नूरपुर स्वास्थ्य खंड में कुल नौ पीएचसी हैं, जिनमें उपरोक्त चार पीएचसी में तैनात मेडिकल ऑफिसरों का चयन एमडी पाठ्यक्रम के लिए होने के बाद पद रिक्त हो गए हैं। डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर इन स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर हजारों ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
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नूरपुर–चंबा सड़क मार्ग पर स्थित पीएचसी सदवां क्षेत्र की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य इकाई मानी जाती है, जहां डॉक्टर की तैनाती के दौरान रोजाना 60 से 70 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते थे। वहीं, रिन्ना और टीका नगरोटा पीएचसी में प्रतिदिन 15 से 20 तथा बासा बजीरा पीएचसी में 20 से 25 मरीज इलाज के लिए आते थे। चिकित्सकों के पद रिक्त होने के बाद मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सदवां पीएचसी में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां फार्मासिस्ट के अलावा महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद भी रिक्त पड़े हैं। इस पीएचसी के अंतर्गत सात स्वास्थ्य उपकेंद्र कार्यरत हैं, लेकिन मेडिकल ऑफिसर के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
सदवां ग्राम पंचायत के प्रधान पवन कुमार ने सरकार से पीएचसी में तत्काल डॉक्टर की तैनाती की मांग की है। उन्होंने कहा कि या तो नियमित डॉक्टर नियुक्त किया जाए या अस्थायी तौर पर डेपुटेशन पर चिकित्सक भेजा जाए, ताकि लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।
उधर, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिलबर सिंह ने बताया कि सदवां, रिन्ना, टीका नगरोटा और बासा बजीरा पीएचसी में मेडिकल ऑफिसरों के एमडी चयन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और उम्मीद है कि सरकार व विभाग जल्द ही समाधान निकालेगा। संवाद
टीकाकरण और राष्ट्रीय कार्यक्रम भी प्रभावित
पीएचसी सदवां में इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ई-वीआईएन) की सुविधा भी उपलब्ध है, जो बच्चों के टीकाकरण में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन मेडिकल ऑफिसर की अनुपस्थिति के कारण न केवल ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि टीकाकरण और टीबी उन्मूलन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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