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Kangra News: स्कूल वर्दी सहायता राशि में भेदभाव पर राजपूत महासभा ने जताया विरोध
Mon, 03 Aug 2026 07:34 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 03 Aug 2026 07:34 AM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश राजपूत महासभा एवं इसकी कांगड़ा जिला इकाई क्षत्रिय सभा ने राज्य सरकार द्वारा स्कूल वर्दी सहायता राशि में किए जा रहे भेदभाव पर कड़ा विरोध व्यक्त किया है। महासभा के एक्स सर्विसमैन विंग के अध्यक्ष मेजर जनरल डीवीएस राणा, प्रेस सचिव कुलदीप राणा और महासचिव दौलत चौहान ने कहा कि सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से आठ तक के सभी विद्यार्थियों को सरकार समान रूप से सहायता राशि दे।
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि स्कूल वर्दी का मुख्य उद्देश्य बच्चों में समानता, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों का विकास करना है। ऐसे में किसी भी प्रकार का जाति आधारित अंतर बच्चों के मन पर बुरा असर डाल सकता है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के मौजूदा निर्देशों के तहत कक्षा एक से आठ तक के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सभी छात्राओं के खातों में 600 रुपये की राशि सीधे भेजी जा रही है, जबकि सामान्य वर्ग, राजपूत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कई छात्र इस सुविधा से वंचित हैं।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से छोटे बच्चों के मन में असमानता की भावना पैदा हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर महासभा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने किसी भी तरह का भेदभाव न होने देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस विसंगति को दूर नहीं किया गया है।
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महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि स्कूल वर्दी का मुख्य उद्देश्य बच्चों में समानता, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों का विकास करना है। ऐसे में किसी भी प्रकार का जाति आधारित अंतर बच्चों के मन पर बुरा असर डाल सकता है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के मौजूदा निर्देशों के तहत कक्षा एक से आठ तक के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सभी छात्राओं के खातों में 600 रुपये की राशि सीधे भेजी जा रही है, जबकि सामान्य वर्ग, राजपूत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कई छात्र इस सुविधा से वंचित हैं।
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उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से छोटे बच्चों के मन में असमानता की भावना पैदा हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर महासभा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने किसी भी तरह का भेदभाव न होने देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस विसंगति को दूर नहीं किया गया है।
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