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Kangra News: सड़क हादसे के पीड़ित को 14 साल के बाद मिलेगा 2.43 लाख मुआवजा
Mon, 29 Jun 2026 06:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 29 Jun 2026 06:55 AM IST
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धर्मशाला। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण देहरा सपना पांडे की अदालत ने करीब 14 वर्ष पुराने सड़क दुर्घटना मामले में फैसला सुनाते हुए घायल व्यक्ति को 2,43,195 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह राशि याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान तक 8 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज के साथ देने के निर्देश दिए हैं।
यह हर्जाना बाइक के चालक और मालिक संयुक्त रूप से अदा करेंगे, जबकि बीमा कंपनी को मामले में उत्तरदायित्व से मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा उन्हें 8,000 रुपये वाद व्यय भी देना होगा। याचिका के अनुसार 19 अगस्त 2012 को दोपहर करीब 3:30 बजे धवाला निवासी मदन लाल सड़क किनारे पैदल जा रहे थे। इसी दौरान ज्वालामुखी की ओर से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनका एक सप्ताह तक उपचार चला। इस संबंध में पुलिस थाना देहरा में एफआईआर दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान देहरा क्षेत्र के बाइक मालिक और चालक अदालत में उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते उन्हें एकतरफा घोषित कर दिया गया।
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वहीं, बीमा कंपनी ने दलील दी कि दुर्घटना के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। अदालत ने दलीलों को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को राहत दी और वाहन मालिक व चालक को ही मुआवजे के भुगतान के आदेश जारी किए।
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यह हर्जाना बाइक के चालक और मालिक संयुक्त रूप से अदा करेंगे, जबकि बीमा कंपनी को मामले में उत्तरदायित्व से मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा उन्हें 8,000 रुपये वाद व्यय भी देना होगा। याचिका के अनुसार 19 अगस्त 2012 को दोपहर करीब 3:30 बजे धवाला निवासी मदन लाल सड़क किनारे पैदल जा रहे थे। इसी दौरान ज्वालामुखी की ओर से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
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हादसे के बाद उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनका एक सप्ताह तक उपचार चला। इस संबंध में पुलिस थाना देहरा में एफआईआर दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान देहरा क्षेत्र के बाइक मालिक और चालक अदालत में उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते उन्हें एकतरफा घोषित कर दिया गया।
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वहीं, बीमा कंपनी ने दलील दी कि दुर्घटना के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। अदालत ने दलीलों को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को राहत दी और वाहन मालिक व चालक को ही मुआवजे के भुगतान के आदेश जारी किए।