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Kangra News: कांगड़ा घाटी रेलवे को यूनेस्को ने टेंटेटिव हेरिटेज सूची में किया शामिल
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धर्मशाला। लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर की ओर से संसद में उठाए गए कांगड़ा घाटी क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे चक्की खड्ड रेलवे पुल पर रेल मंत्रालय ने अहम जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, 20 अगस्त 2022 की भारी बारिश में बह गए चक्की खड्ड ब्रिज नंबर 32 का पुनर्निर्माण अब पूरा हो चुका है। इसके साथ ही पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक पूरे रेल खंड को ट्रेन संचालन के लिए उपयुक्त घोषित कर दिया गया है।
रेल मंत्रालय ने बताया कि यूनेस्को ने कांगड़ा घाटी रेलवे को माउंटेन रेलवे ऑफ इंडिया विश्व धरोहर स्थल के विस्तार के रूप में अपनी टेंटेटिव सूची में शामिल कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ कांगड़ा घाटी रेलवे अब दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कालका-शिमला रेलवे और नीलगिरि माउंटेन रेलवे जैसी प्रतिष्ठित रेल लाइनों की श्रेणी में शामिल हो गई है। टेंटेटिव सूची में शामिल होना यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जा पाने की दिशा में पहला औपचारिक कदम माना जाता है।
इस महत्वपूर्ण रेल लिंक की बहाली के लिए अनुराग सिंह ठाकुर लगातार प्रयासरत रहे। उन्होंने उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक और जम्मू डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के साथ नियमित संवाद कर पुनर्निर्माण कार्य को प्राथमिकता दिलाई। क्षेत्र के लोगों की ओर से की गई उनकी पैरवी ने परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने में अहम भूमिका निभाई।
इस दौरान अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष सहयोग से हिमाचल प्रदेश में रेल सेवाओं के विस्तार को पिछले वर्षों में नई गति मिली है। चक्की ब्रिज की बहाली और पूर्ण ट्रेन सेवाओं का पुनः संचालन एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। उनका लक्ष्य कांगड़ा घाटी रेलवे को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाना है, जिससे हिमाचल प्रदेश वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगा और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
रेल मंत्रालय ने कांगड़ा घाटी रेलवे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरो गेज खंड (लगभग 200 किमी) को ब्रॉड गेज में बदलने के लिए सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु फील्ड सर्वे भी शुरू कर दिया गया है।
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रेल मंत्रालय ने बताया कि यूनेस्को ने कांगड़ा घाटी रेलवे को माउंटेन रेलवे ऑफ इंडिया विश्व धरोहर स्थल के विस्तार के रूप में अपनी टेंटेटिव सूची में शामिल कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ कांगड़ा घाटी रेलवे अब दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कालका-शिमला रेलवे और नीलगिरि माउंटेन रेलवे जैसी प्रतिष्ठित रेल लाइनों की श्रेणी में शामिल हो गई है। टेंटेटिव सूची में शामिल होना यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जा पाने की दिशा में पहला औपचारिक कदम माना जाता है।
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इस महत्वपूर्ण रेल लिंक की बहाली के लिए अनुराग सिंह ठाकुर लगातार प्रयासरत रहे। उन्होंने उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक और जम्मू डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के साथ नियमित संवाद कर पुनर्निर्माण कार्य को प्राथमिकता दिलाई। क्षेत्र के लोगों की ओर से की गई उनकी पैरवी ने परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने में अहम भूमिका निभाई।
इस दौरान अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष सहयोग से हिमाचल प्रदेश में रेल सेवाओं के विस्तार को पिछले वर्षों में नई गति मिली है। चक्की ब्रिज की बहाली और पूर्ण ट्रेन सेवाओं का पुनः संचालन एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। उनका लक्ष्य कांगड़ा घाटी रेलवे को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाना है, जिससे हिमाचल प्रदेश वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगा और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
रेल मंत्रालय ने कांगड़ा घाटी रेलवे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरो गेज खंड (लगभग 200 किमी) को ब्रॉड गेज में बदलने के लिए सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु फील्ड सर्वे भी शुरू कर दिया गया है।