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समाज में समरसता और राष्ट्र निर्माण ही आरएसएस का मुख्य ध्येय : होसबाले
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धर्मशाला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से आयोजित प्रमुख जन संगोष्ठी में उपस्थित म
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धर्मशाला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सुधार का एक व्यापक आंदोलन है। रविवार को धर्मशाला के समीप एक निजी होटल के सभागार में आयोजित प्रबुद्ध जन संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित, सशक्त और समरस बनाना है, ताकि भारत विश्व पटल पर अपनी गौरवशाली भूमिका निभा सके।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करते हुए होसबाले ने बताया कि संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर चुका है। उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि 1925 में विजयदशमी के दिन जिस ध्येय के साथ संघ की नींव रखी गई थी, आज वह वटवृक्ष बनकर राष्ट्र सेवा में समर्पित है। उन्होंने जोर दिया कि समाज की उन्नति के लिए व्यक्तिगत चरित्र और राष्ट्रीय चरित्र दोनों का होना अनिवार्य है।
सरकार्यवाह ने कहा कि संघ समाज से हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर समरसता स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में संघ के एक लाख से अधिक सेवा कार्य संचालित हो रहे हैं और इतने ही स्थानों पर शाखाएं, मिलन व मंडलियां राष्ट्रभक्ति का अलख जगा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की जीवनशैली से प्रेरणा ले रही है और भारत विश्व के अग्रणी देशों में शुमार हो रहा है।
संगोष्ठी के दौरान उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने सामाजिक, आर्थिक, शिक्षा नीति और संघ में महिलाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका सरकार्यवाह ने विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवक समाज जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं और सामूहिक प्रयास ही देश के विकास का असली आधार है।
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संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करते हुए होसबाले ने बताया कि संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर चुका है। उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि 1925 में विजयदशमी के दिन जिस ध्येय के साथ संघ की नींव रखी गई थी, आज वह वटवृक्ष बनकर राष्ट्र सेवा में समर्पित है। उन्होंने जोर दिया कि समाज की उन्नति के लिए व्यक्तिगत चरित्र और राष्ट्रीय चरित्र दोनों का होना अनिवार्य है।
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सरकार्यवाह ने कहा कि संघ समाज से हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर समरसता स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में संघ के एक लाख से अधिक सेवा कार्य संचालित हो रहे हैं और इतने ही स्थानों पर शाखाएं, मिलन व मंडलियां राष्ट्रभक्ति का अलख जगा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की जीवनशैली से प्रेरणा ले रही है और भारत विश्व के अग्रणी देशों में शुमार हो रहा है।
संगोष्ठी के दौरान उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने सामाजिक, आर्थिक, शिक्षा नीति और संघ में महिलाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका सरकार्यवाह ने विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवक समाज जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं और सामूहिक प्रयास ही देश के विकास का असली आधार है।