लारजी (कुल्लू)। कनौन में महामाई आदि शक्ति माता के सम्मान में हूम (पर्व) देव रीति-रिवाजों और सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। देव पर्व में क्षेत्र सहित दूरदराज से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु एवं देवलू प्रत्यक्षदर्शी बने। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष अवसर पर महामाई आदि शक्ति माता अपनी दिव्य शक्ति के विशेष स्वरूप में प्रकट होकर पूरे क्षेत्र को सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसी आस्था और विश्वास के कारण यह देव पर्व क्षेत्र के सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।
देव परंपरा के अनुसार महामाई आदि शक्ति माता कछैणी नामक स्थान में स्थित देवालय से हारियानों और कारकूनों के साथ कनौन पहुंचीं। वहां, देवता ब्रह्मा से देव मिलन की परंपरा का निर्वहन किया। इस पावन आयोजन का मुख्य आकर्षण माता के समक्ष 50 फीट लंबी मशाल का प्रज्वलन रहा। मान्यता है कि इसी दिव्य ज्योति के माध्यम से माता अपनी शक्ति का प्राकट्य कर क्षेत्र की रक्षा, सुख-समृद्धि और लोक कल्याण का आशीर्वाद प्रदान करती हैं और बुरी शक्तियों को भगाती हैं। माता के गूर रोशन ठाकुर ने बताया कि हूम क्षेत्र का अत्यंत प्राचीन देव पर्व है। संवाद