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Kullu News: भाजपा, कांग्रेस को कद्दावर नेताओं की अनदेखी पड़ी भारी
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कुल्लू। नगर परिषद कुल्लू के चुनाव परिणाम ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को सोचने पर मजबूर किया है। जिस तरह से समर्थित चेहरे पिछड़ गए, उससे साफ है कि यहां कांग्रेस और भाजपा के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। अब चर्चा है कि कांग्रेस को नगर परिषद की राजनीति में अच्छी खासी पकड़ रखने वाले गोपाल कृष्ण महंत की अनदेखी भारी पड़ गई। महंत करीब तीन दशक से नगर परिषद में किंगमेकर के साथ दो बार अध्यक्ष, दो बार उपाध्यक्ष रहकर कांग्रेस की साख बढ़ाते आए हैं। इस बार शुरुआत से ही उन्हें अनदेखा किया गया। इस कारण पार्टी समर्थित महज तीन पार्षद ही जीत पाए।
दूसरी तरफ भाजपा के भीतर की गुटबाजी भी चुनाव में खुलकर देखने को मिली। जिस तरह से पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ बागी होकर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़े, उससे समीकरण बदल गए। वार्ड नंबर आठ में तो भाजपा की गुटबाजी इतनी हावी रही कि यहां पार्टी विचारधारा के दो उम्मीदवारों में समर्थित उम्मीदवार तय नहीं हो पाए। वार्ड नंबर एक में भाजपा से अलग हुए राम सिंह ने अपनी पत्नी पुष्पा को चुनावी मैदान में उतारकर दोनों दलों को जमीन सुंघाकर शहर की राजनीति में जोरदार वापसी की है।
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अब अध्यक्ष की कुर्सी का जोड़तोड़
अब अध्यक्ष की कुर्सी के लिए के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। दोनों प्रमुख दलों के पास तीन-तीन पार्षद हैं लेकिन निर्दलीय पांच पार्षदों में तीन भाजपा पृष्ठभूमि के हैं जबकि एक कांग्रेस और एक सीपीआईएम पृष्ठभूमि का। ऐसे में भाजपा के पास राम सिंह से समझौता करने पर बहुमत बनता दिख रहा है। कांग्रेस का खेल भी राम सिंह का साथ लिए बिना नहीं बन पा रहा है।
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अब अध्यक्ष की कुर्सी के लिए के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। दोनों प्रमुख दलों के पास तीन-तीन पार्षद हैं लेकिन निर्दलीय पांच पार्षदों में तीन भाजपा पृष्ठभूमि के हैं जबकि एक कांग्रेस और एक सीपीआईएम पृष्ठभूमि का। ऐसे में भाजपा के पास राम सिंह से समझौता करने पर बहुमत बनता दिख रहा है। कांग्रेस का खेल भी राम सिंह का साथ लिए बिना नहीं बन पा रहा है।
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