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Kullu News: पूईद में देवलुओं और हारियानों ने डाली नाटी
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अधिष्ठात्री माता जगन्नाथी भुवनेश्वरी के सम्मान में आयोजित मेला संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिला मुख्यालय के साथ सटी खराहल घाटी के पूईद में देव परंपराओं का निर्वहन हुआ। अधिष्ठात्री माता जगन्नाथी भुवनेश्वरी देवी के सम्मान में आयोजित पांच दिवसीय मेला सोमवार को संपन्न हुआ। मेले में देव वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच देव परंपरा का निर्वहन हुआ। श्रद्धालुओं और हारियानों ने माता के दरबार में चाकरी दी और माता से आशीर्वाद लिया।
सोमवार को माता की सौह में देवलुओं के साथ हारियानों ने कुल्लवी नाटी डाली। यह सिलसिला तीन घंटे तक चलता रहा। देवलुओं के साथ माता के कारकूनों ने भी नृत्य किया। मुख्य देवलू ने धोती पहनकर नृत्य किया। सबसे पहले नाटी का आगाज माता के कारदार चमन ठाकुर ने किया।
पूईद पंचायत के पूर्व प्रधान उत्तम शर्मा, राजेश, अमन, चंदे राम ने कहा कि मेले के अंतिम दिन माता के मंदिर में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने माथा टेका और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि माता के सम्मान में मेला पांच दिन तक मनाया जाता हैं। अंतिम दिन माता की सौह में देवलू और हारियानों ने कुल्लवी नाटी डाली। इस दिन माता के देव कार्य नहीं होते हैं, लेकिन माता के मंदिर परिसर में नाटी का आयोजन किया जाता है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिला मुख्यालय के साथ सटी खराहल घाटी के पूईद में देव परंपराओं का निर्वहन हुआ। अधिष्ठात्री माता जगन्नाथी भुवनेश्वरी देवी के सम्मान में आयोजित पांच दिवसीय मेला सोमवार को संपन्न हुआ। मेले में देव वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच देव परंपरा का निर्वहन हुआ। श्रद्धालुओं और हारियानों ने माता के दरबार में चाकरी दी और माता से आशीर्वाद लिया।
सोमवार को माता की सौह में देवलुओं के साथ हारियानों ने कुल्लवी नाटी डाली। यह सिलसिला तीन घंटे तक चलता रहा। देवलुओं के साथ माता के कारकूनों ने भी नृत्य किया। मुख्य देवलू ने धोती पहनकर नृत्य किया। सबसे पहले नाटी का आगाज माता के कारदार चमन ठाकुर ने किया।
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पूईद पंचायत के पूर्व प्रधान उत्तम शर्मा, राजेश, अमन, चंदे राम ने कहा कि मेले के अंतिम दिन माता के मंदिर में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने माथा टेका और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि माता के सम्मान में मेला पांच दिन तक मनाया जाता हैं। अंतिम दिन माता की सौह में देवलू और हारियानों ने कुल्लवी नाटी डाली। इस दिन माता के देव कार्य नहीं होते हैं, लेकिन माता के मंदिर परिसर में नाटी का आयोजन किया जाता है। संवाद

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