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Kullu News: पथरीली डगर से अब डाक नहीं पहुंचाएंगी कमला
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 08 Feb 2026 09:42 PM IST
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डाक विभाग से होंगी सेवानिवृत्त, रोज पहाड़ को चुनौती देकर पहुंचाती रहीं डाक
पति की मौत के बाद संभाली जिम्मेदारी, कई किलोमीटर पैदल चल देती रहीं सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। जब सुविधाएं नहीं थीं और रास्ते जानलेवा थे, तब भी एक महिला रोजाना पहाड़ों को चुनौती देती रही। सैंज घाटी की दुर्गम पगडंडियों पर दशकों तक डाक पहुंचाने वाली कमला देवी सोमवार को सेवानिवृत्त हो रही हैं।
यह सिर्फ एक नौकरी की समाप्ति नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और महिला सशक्तीकरण की मिसाल भरी यात्रा का सम्मान है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में 90 के दशक से घर-घर डाक पहुंचाने वाली कमला अपना सेवाकाल पूरा कर चुकी हैं। कमला ने साल 1997 में सेवाकाल के दौरान पति के देहांत के बाद डाक विभाग में सेवाएं शुरू की थीं। उस दौर में क्षेत्र में पैदल चलकर दुर्गम पहाड़ियों को लांघकर घर-घर डाक पहुंचाने का काम किया। अब उनका सेवाकाल पूरा हो गया है। सोमवार को वह डाक विभाग से सेवानिवृत्त होंगी।
कमला देवी के पुत्र ज्ञान चंद ने कहा कि उनकी माता ने उस दौर में क्षेत्र के दुर्गम, खतरनाक रास्तों को लांघकर सेवा दी है, जब न क्षेत्र में सड़क थी और न ही संचार के उतने अधिक संसाधन थे। जब पिता संगत राम का देहांत हुआ था, तब वह छठी कक्षा में पढ़ते थे। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी माता पर आ गई थी। विभाग ने उन्हें पिता की जगह डाक सेवक के पद पर तैनात कर दिया। माता ने पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के साथ विभाग में अपनी सेवा का फर्ज भी निभाया। हालांकि पथरीले रास्तों और पहाड़ के साथ परिवार की जिम्मेदारी ने उनकी खूब परीक्षा ली लेकिन वह डटी रहीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। जब सुविधाएं नहीं थीं और रास्ते जानलेवा थे, तब भी एक महिला रोजाना पहाड़ों को चुनौती देती रही। सैंज घाटी की दुर्गम पगडंडियों पर दशकों तक डाक पहुंचाने वाली कमला देवी सोमवार को सेवानिवृत्त हो रही हैं।
यह सिर्फ एक नौकरी की समाप्ति नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और महिला सशक्तीकरण की मिसाल भरी यात्रा का सम्मान है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में 90 के दशक से घर-घर डाक पहुंचाने वाली कमला अपना सेवाकाल पूरा कर चुकी हैं। कमला ने साल 1997 में सेवाकाल के दौरान पति के देहांत के बाद डाक विभाग में सेवाएं शुरू की थीं। उस दौर में क्षेत्र में पैदल चलकर दुर्गम पहाड़ियों को लांघकर घर-घर डाक पहुंचाने का काम किया। अब उनका सेवाकाल पूरा हो गया है। सोमवार को वह डाक विभाग से सेवानिवृत्त होंगी।
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कमला देवी के पुत्र ज्ञान चंद ने कहा कि उनकी माता ने उस दौर में क्षेत्र के दुर्गम, खतरनाक रास्तों को लांघकर सेवा दी है, जब न क्षेत्र में सड़क थी और न ही संचार के उतने अधिक संसाधन थे। जब पिता संगत राम का देहांत हुआ था, तब वह छठी कक्षा में पढ़ते थे। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी माता पर आ गई थी। विभाग ने उन्हें पिता की जगह डाक सेवक के पद पर तैनात कर दिया। माता ने पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के साथ विभाग में अपनी सेवा का फर्ज भी निभाया। हालांकि पथरीले रास्तों और पहाड़ के साथ परिवार की जिम्मेदारी ने उनकी खूब परीक्षा ली लेकिन वह डटी रहीं।