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Kullu News: चंद्रा-ब्यास लिंक परियोजना का विरोध
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तांदी बांध संघर्ष समिति ने पर्यावरणीय प्रभावों पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। तांदी बांध संघर्ष समिति ने कोकसर में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास (चंद्रा-ब्यास) लिंक परियोजना के खिलाफ विरोध जताया। समिति ने इस परियोजना की टेंडर प्रक्रिया, पारदर्शिता और पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाए हैं। समिति के अध्यक्ष विनोद लारजे ने कहा कि चिनाब-ब्यास लिंक जैसी परियोजना संवेदनशील उच्च हिमालयी शीत मरुस्थल लाहौल और ब्यास नदी घाटी के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बांध स्थल कोकसर के आसपास स्थित संवेदनशील ग्लेशियर क्षेत्रों में टनल निर्माण और भारी ब्लास्टिंग से प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने, भूस्खलनों में वृद्धि तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के गंभीर रूप से प्रभावित होने का खतरा है। कहा कि तांदी बांध संघर्ष समिति और स्थानीय समुदाय इस परियोजना का विरोध करते हैं।
समिति के उपाध्यक्ष अरुण राणा और सचिव विक्रम कटोच ने कहा कि वर्ष 2019 में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से चिनाब नदी घाटी का संचयी पर्यावरणीय प्रभाव आकलन करवाया गया था। उस रिपोर्ट में चिनाब-ब्यास लिंक जैसी बड़ी परियोजना का कोई उल्लेख नहीं मिलता। कहा कि बिना किसी व्यापक और समग्र पर्यावरणीय मूल्यांकन के इस परियोजना को आगे बढ़ाना पूरी घाटी के लिए जोखिमपूर्ण है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। तांदी बांध संघर्ष समिति ने कोकसर में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास (चंद्रा-ब्यास) लिंक परियोजना के खिलाफ विरोध जताया। समिति ने इस परियोजना की टेंडर प्रक्रिया, पारदर्शिता और पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाए हैं। समिति के अध्यक्ष विनोद लारजे ने कहा कि चिनाब-ब्यास लिंक जैसी परियोजना संवेदनशील उच्च हिमालयी शीत मरुस्थल लाहौल और ब्यास नदी घाटी के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बांध स्थल कोकसर के आसपास स्थित संवेदनशील ग्लेशियर क्षेत्रों में टनल निर्माण और भारी ब्लास्टिंग से प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने, भूस्खलनों में वृद्धि तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के गंभीर रूप से प्रभावित होने का खतरा है। कहा कि तांदी बांध संघर्ष समिति और स्थानीय समुदाय इस परियोजना का विरोध करते हैं।
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समिति के उपाध्यक्ष अरुण राणा और सचिव विक्रम कटोच ने कहा कि वर्ष 2019 में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से चिनाब नदी घाटी का संचयी पर्यावरणीय प्रभाव आकलन करवाया गया था। उस रिपोर्ट में चिनाब-ब्यास लिंक जैसी बड़ी परियोजना का कोई उल्लेख नहीं मिलता। कहा कि बिना किसी व्यापक और समग्र पर्यावरणीय मूल्यांकन के इस परियोजना को आगे बढ़ाना पूरी घाटी के लिए जोखिमपूर्ण है। संवाद