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Kullu News: विशेषज्ञों की कमी से घंटों लाइनों में लग रहे मरीज
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, नेत्र रोग, त्वचा रोग और शिशु रोग के महज एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन विभागों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के कारण उन्हें घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। इससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई लोग मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
अस्पताल की शिशु रोग और नेत्र रोग ओपीडी में रोजाना 120 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। वहीं, त्वचा रोग ओपीडी में भी प्रतिदिन औसतन 60 से 80 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बावजूद इन विभागों में एक-एक ही विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं। अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट होने के कारण अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को दो से तीन माह बाद की तारीख मिल रही है। कई मरीज मजबूरन निजी अस्पतालों में जाकर महंगे दाम पर अल्ट्रासाउंड करवाने को विवश हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल में यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में वर्तमान में 34 चिकित्सक तैनात हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि जिन ओपीडी में रोजाना अधिक भीड़ रहती है, वहां कम से कम दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जानी चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और अस्पताल में लंबी कतारों से राहत मिले।
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तीमारदार सौरव, मोहित, रमन शर्मा, अशोक ठाकुर, महिमा शर्मा, रीतिका ठाकुर, शालिनी राणा और आकांक्षा वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग से विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल में वर्तमान में 34 चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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जिले में एक रेडियोलॉजिस्ट और एक शिशु रोग विशेषज्ञ
जिला कुल्लू के पांच स्वास्थ्य खंडों नग्गर, जरी, बंजार, आनी और निरमंड में महज एक रेडियोलॉजिस्ट और एक शिशु रोग विशेषज्ञ तैनात है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के अलावा जिले के किसी भी स्वास्थ्य खंड में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इसी प्रकार छोटे बच्चों को भी क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों के साथ तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है।
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अस्पताल की शिशु रोग और नेत्र रोग ओपीडी में रोजाना 120 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। वहीं, त्वचा रोग ओपीडी में भी प्रतिदिन औसतन 60 से 80 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बावजूद इन विभागों में एक-एक ही विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं। अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट होने के कारण अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को दो से तीन माह बाद की तारीख मिल रही है। कई मरीज मजबूरन निजी अस्पतालों में जाकर महंगे दाम पर अल्ट्रासाउंड करवाने को विवश हैं।
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क्षेत्रीय अस्पताल में यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में वर्तमान में 34 चिकित्सक तैनात हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि जिन ओपीडी में रोजाना अधिक भीड़ रहती है, वहां कम से कम दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जानी चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और अस्पताल में लंबी कतारों से राहत मिले।
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तीमारदार सौरव, मोहित, रमन शर्मा, अशोक ठाकुर, महिमा शर्मा, रीतिका ठाकुर, शालिनी राणा और आकांक्षा वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग से विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल में वर्तमान में 34 चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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जिले में एक रेडियोलॉजिस्ट और एक शिशु रोग विशेषज्ञ
जिला कुल्लू के पांच स्वास्थ्य खंडों नग्गर, जरी, बंजार, आनी और निरमंड में महज एक रेडियोलॉजिस्ट और एक शिशु रोग विशेषज्ञ तैनात है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के अलावा जिले के किसी भी स्वास्थ्य खंड में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इसी प्रकार छोटे बच्चों को भी क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों के साथ तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है।
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