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Kullu News: ममता के आंचल में अनाथ बच्चों का जीवन संवार रहीं सुदर्शना
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 23 Jan 2026 10:56 PM IST
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सुदर्शन के आंचल में पल रहे बच्चे आत्मनिर्भरता की सीख लेते हुए।
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मनु की नगरी में 22 सालों से पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भर बनने की भी दे रही हैं सीख
बोलीं- सिस्टम ने परेशान किया फिर भी नहीं मानी हार, पांच साल तक भुगता केस
गौरीशंकर
कुल्लू। भले ही प्रदेश सरकार ने बेसहारा बच्चों को गोद लेने की पहल की है लेकिन मनु की नगरी में एक ऐसी मां है जिन्होंने बेसहारा बच्चों के लिए 22 वर्षों से अपना आंचल फैलाया है।
सुदर्शना ने ऐसे बच्चों को अपनाया जिनके पास न तो छत थी और न ही भविष्य की राह....। उनके पास आने वाले बेसहारा बच्चों को सिर्फ छत ही नहीं मिली, बल्कि पढ़ाई करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की भी सीख मिल रही है। सुदर्शना ने वर्ष 2004 में राधा एनजीओ का पंजीकरण किया था। एनजीओ के तहत बच्चों का पालन-पोषण किया जा रहा है। हालांकि शुरुआत में उनके पास कम बच्चे थे लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास 32 बच्चे हो गए थे। आज उनके पास 10 लड़कियां हैं। इनमें अधिकतर पढ़ाई कर रही हैं। इनमें 3 सोशल वर्क और हिंदी में एमए कर रही हैं। 5 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें घर के लिए ही मदद दी जाती है जबकि 7 बच्चों को ट्यूशन दी जा रही है।
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पढ़ाई के साथ प्रशिक्षण भी
सुदर्शना के राधा एनजीओ में आने वाले बेसहारा बच्चों को स्कूली पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भर बनने के लिए आचार, जैम, स्वेटर, पेंटिंग आदि बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि किसी भी तरह की परिस्थिति आने पर वह जीवन में आत्मनिर्भर बन सकें। गौरतलब है कि राधा एनजीओ में सुदर्शना ठाकुर बच्चों के साथ मिलकर इस तरह की वस्तुओं को बनाने का काम भी करती हैं जिन्हें बेचकर आय अर्जित होती है उससे खर्चे चलते हैं।
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एक दौर ऐसा भी आया
सुदर्शना ठाकुर का कहना है कि हालांकि पुलिस विभाग और लोग भी ऐसे बेसहारा बच्चों को उनके पास आकर छोड़ देते थे परंतु वर्ष 2017 में ऐसा समय आया जब उनके पास मौजूद बच्चों को छीनकर पुलिस ले गई। हम पर मामला दर्ज किया गया जो पांच सालों तक चला। बेसहारा बच्चों की मदद के लिए पीछे हटकर नहीं देखा। यही कारण है आज भी यहां 10 लड़कियां मौजूद हैं।
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अपनी जगह नहीं होने का मलाल
उनका कहना है कि बेसहारा बच्चों को आश्रय देने के लिए हमारे पास अपनी कोई जमीन नहीं है और न ही कोई अपना घर है। ऐसे में नग्गर में इन दिनों किराये के घर में बच्चों के साथ रह रही हैं। इतने समय से न तो सरकार की ओर से कोई मदद मिली है और न ही किसी दानी सजन ने जमीन का टुकड़ा दान दिया है।
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कुल्लू। भले ही प्रदेश सरकार ने बेसहारा बच्चों को गोद लेने की पहल की है लेकिन मनु की नगरी में एक ऐसी मां है जिन्होंने बेसहारा बच्चों के लिए 22 वर्षों से अपना आंचल फैलाया है।
सुदर्शना ने ऐसे बच्चों को अपनाया जिनके पास न तो छत थी और न ही भविष्य की राह....। उनके पास आने वाले बेसहारा बच्चों को सिर्फ छत ही नहीं मिली, बल्कि पढ़ाई करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की भी सीख मिल रही है। सुदर्शना ने वर्ष 2004 में राधा एनजीओ का पंजीकरण किया था। एनजीओ के तहत बच्चों का पालन-पोषण किया जा रहा है। हालांकि शुरुआत में उनके पास कम बच्चे थे लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास 32 बच्चे हो गए थे। आज उनके पास 10 लड़कियां हैं। इनमें अधिकतर पढ़ाई कर रही हैं। इनमें 3 सोशल वर्क और हिंदी में एमए कर रही हैं। 5 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें घर के लिए ही मदद दी जाती है जबकि 7 बच्चों को ट्यूशन दी जा रही है।
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सुदर्शना के राधा एनजीओ में आने वाले बेसहारा बच्चों को स्कूली पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भर बनने के लिए आचार, जैम, स्वेटर, पेंटिंग आदि बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि किसी भी तरह की परिस्थिति आने पर वह जीवन में आत्मनिर्भर बन सकें। गौरतलब है कि राधा एनजीओ में सुदर्शना ठाकुर बच्चों के साथ मिलकर इस तरह की वस्तुओं को बनाने का काम भी करती हैं जिन्हें बेचकर आय अर्जित होती है उससे खर्चे चलते हैं।
एक दौर ऐसा भी आया
सुदर्शना ठाकुर का कहना है कि हालांकि पुलिस विभाग और लोग भी ऐसे बेसहारा बच्चों को उनके पास आकर छोड़ देते थे परंतु वर्ष 2017 में ऐसा समय आया जब उनके पास मौजूद बच्चों को छीनकर पुलिस ले गई। हम पर मामला दर्ज किया गया जो पांच सालों तक चला। बेसहारा बच्चों की मदद के लिए पीछे हटकर नहीं देखा। यही कारण है आज भी यहां 10 लड़कियां मौजूद हैं।
अपनी जगह नहीं होने का मलाल
उनका कहना है कि बेसहारा बच्चों को आश्रय देने के लिए हमारे पास अपनी कोई जमीन नहीं है और न ही कोई अपना घर है। ऐसे में नग्गर में इन दिनों किराये के घर में बच्चों के साथ रह रही हैं। इतने समय से न तो सरकार की ओर से कोई मदद मिली है और न ही किसी दानी सजन ने जमीन का टुकड़ा दान दिया है।