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Kullu News: तनाव मुक्त कैसे रहें बच्चे, शिक्षकों ने सीखी तकनीक
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डाइट ने कार्यशाला आयोजित कर शिक्षकों को दिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। स्कूलों में बच्चे तनावमुक्त कैसे रहें, इस संबंध में शिक्षकों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में प्रशिक्षण दिया गया। डाइट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ मिलकर आयुष्मान भारत-स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम के शिक्षकों को जीवन कौशल की भी तकनीक सिखाई। शिक्षकों के लिए चार दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसका समापन शनिवार को हुआ। समापन अवसर पर डाइट की उपप्रधानाचार्य पार्वती देवी मुख्यातिथि रहीं।
प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य वक्ता नारायण ठाकुर, विपना वर्मा, निर्मला शर्मा, मीना वर्मा, रोहित मेहता, श्वेता अवस्थी और अच्छर सिंह ने शिक्षकों को आपसी संबंध, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, पोषण आदि का प्रशिक्षण दिया। साथ ही नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम, प्रजनन स्वास्थ्य और एचआईवी एड्स की रोकथाम, हिंसा से सुरक्षा, इंटरनेट, गैजेट्स और सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल करने के बारे में भी जानकारी दी।
मुख्यातिथि ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की मानसिक और शारीरिक गतिविधियों से उनकी कमजोरियों की पहचान करना सिखाना रहा, ताकि समय पर पहचान कर कमियों का निदान कर बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यशाला के समन्वयक जितेंद्र शर्मा ने कहा कि कार्यशाला में सरकारी विद्यालयों के हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर के तौर पर नियुक्त 51 शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। स्कूलों में बच्चे तनावमुक्त कैसे रहें, इस संबंध में शिक्षकों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में प्रशिक्षण दिया गया। डाइट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ मिलकर आयुष्मान भारत-स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम के शिक्षकों को जीवन कौशल की भी तकनीक सिखाई। शिक्षकों के लिए चार दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसका समापन शनिवार को हुआ। समापन अवसर पर डाइट की उपप्रधानाचार्य पार्वती देवी मुख्यातिथि रहीं।
प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य वक्ता नारायण ठाकुर, विपना वर्मा, निर्मला शर्मा, मीना वर्मा, रोहित मेहता, श्वेता अवस्थी और अच्छर सिंह ने शिक्षकों को आपसी संबंध, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, पोषण आदि का प्रशिक्षण दिया। साथ ही नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम, प्रजनन स्वास्थ्य और एचआईवी एड्स की रोकथाम, हिंसा से सुरक्षा, इंटरनेट, गैजेट्स और सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल करने के बारे में भी जानकारी दी।
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मुख्यातिथि ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की मानसिक और शारीरिक गतिविधियों से उनकी कमजोरियों की पहचान करना सिखाना रहा, ताकि समय पर पहचान कर कमियों का निदान कर बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यशाला के समन्वयक जितेंद्र शर्मा ने कहा कि कार्यशाला में सरकारी विद्यालयों के हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर के तौर पर नियुक्त 51 शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। संवाद
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