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Kullu News: रथ में विराजमान हुए भुट्ठी के देवता क्षेत्रपाल थान
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क्षेत्र से बुरी शक्तियों को दूर भगाने की किया देव परंपरा का निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी।
कुल्लू। भुट्ठी के आराध्य देवता क्षेत्रपाल थान शनोली पर्व के अवसर पर सोमवार को विधिवत रथ में विराजमान हो गए है। देवता अपने स्थायी निवास से रथ में सवार होकर देव स्थल पर पहुंचे। शनोली पर्व के तहत यहां पर मेला आयोजित किया गया।
शनोली पर्व क्षेत्र की प्राचीन देव परंपरा और लोक संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। देवता के रथ में विराजमान होने के बाद देव कारकूनों और हारियानों के साथ पारंपरिक देव विधियों का निर्वहन किया गया। देवता के अपने देवस्थल पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद दिया। इस दौरान मेले में स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया।
देवता के कारदार सुंदर सिंह ने कहा कि शनोली पर्व के दौरान देवता के गूर ने विशेष देव विधि संपन्न करवाई। परंपरा के अनुसार गूर सरसों और छोरगन पत्थर के कणों को मिलाकर मंत्र प्रक्रिया को पूर्ण करते हैं। इसके बाद लोग इसे अपने घरों की चौखट पर लगाते हैं। मान्यता है कि इस पारंपरिक प्रक्रिया से घर में मौजूद नकारात्मक और बुरी शक्तियों को दूर किया जाता है। स्थानीय लोग नारायण ठाकुर, दलीप, रमेश, ने बताया कि शनोली पर्व सदियों से चली आ रही देव परंपराओं को जीवंत रखने का माध्यम है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी।
कुल्लू। भुट्ठी के आराध्य देवता क्षेत्रपाल थान शनोली पर्व के अवसर पर सोमवार को विधिवत रथ में विराजमान हो गए है। देवता अपने स्थायी निवास से रथ में सवार होकर देव स्थल पर पहुंचे। शनोली पर्व के तहत यहां पर मेला आयोजित किया गया।
शनोली पर्व क्षेत्र की प्राचीन देव परंपरा और लोक संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। देवता के रथ में विराजमान होने के बाद देव कारकूनों और हारियानों के साथ पारंपरिक देव विधियों का निर्वहन किया गया। देवता के अपने देवस्थल पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद दिया। इस दौरान मेले में स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया।
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देवता के कारदार सुंदर सिंह ने कहा कि शनोली पर्व के दौरान देवता के गूर ने विशेष देव विधि संपन्न करवाई। परंपरा के अनुसार गूर सरसों और छोरगन पत्थर के कणों को मिलाकर मंत्र प्रक्रिया को पूर्ण करते हैं। इसके बाद लोग इसे अपने घरों की चौखट पर लगाते हैं। मान्यता है कि इस पारंपरिक प्रक्रिया से घर में मौजूद नकारात्मक और बुरी शक्तियों को दूर किया जाता है। स्थानीय लोग नारायण ठाकुर, दलीप, रमेश, ने बताया कि शनोली पर्व सदियों से चली आ रही देव परंपराओं को जीवंत रखने का माध्यम है। संवाद
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