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हिमाचल: चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट को केंद्र ने दी मंजूरी, सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद उठाया बड़ा कदम

संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग/धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 26 May 2026 11:07 AM IST
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सार

चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट को मंजूरी सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद केंद्र का बड़ा कदम माना जा रहा है। परियोजना को लेकर नई दिल्ली में तेजी से गतिविधियां बढ़ी हैं, जबकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर...

The waters of Lahaul Chandra River will merge with the Beas boosting power generation
लाहौल स्पीति में चंद्रा और भागा नदियों का संगम - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

लाहौल क्षेत्र में चंद्रा नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ने की बहुचर्चित चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना पर केंद्र सरकार जल्द काम शुरू कर सकती है। चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट को मंजूरी सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद केंद्र का बड़ा कदम माना जा रहा है।   परियोजना को लेकर नई दिल्ली में तेजी से गतिविधियां बढ़ी हैं, जबकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। परियोजना के तहत कोकसर क्षेत्र में पीर पंजाल पर्वत के नीचे 2,352 करोड़ रुपये की लागत से करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग प्रस्तावित है। 

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इस परियोजना और गाद प्रबंधन प्रणाली पर करीब 2,600 करोड़ रुपये  खर्च होंगे।  इसके साथ ही लाहौल घाटी में चंद्रा नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाने की भी योजना है, जिसके माध्यम से जल प्रवाह को नियंत्रित कर सुरंग प्रणाली में मोड़ा जाएगा। सूत्रों के अनुसार यह पूरी परियोजना जल को हाइड्रोलिक ढांचे और सुरंग नेटवर्क के जरिए ब्यास बेसिन की ओर ले जाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इससे  हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, जो करीब 4,000 मेगावाट तक अतिरिक्त उत्पादन का आधार बन सकती है।
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यह योजना सिंधु जल संधि (1960) के तहत पश्चिमी नदियों के जल के उपयोग की अनुमति से जुड़ी बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो इसका असर जल प्रबंधन, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर पड़ेगा। हालांकि, पर्यावरणीय और भौगोलिक पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक होगा।

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राष्ट्रीय हितों को मजबूत करने वाला कदम
चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट हिमाचल सहित पूरे उत्तर भारत के लिए लाभकारी है। परियोजना देश को जल एवं ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाएगी। ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद सरकार का यह कदम राष्ट्रीय हितों को और मजबूत करने वाला साबित होगा। - अनुराग सिंह ठाकुर, सांसद
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