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Mandi News: एक साथ चुनावी ड्यूटी पर केंद्रीय विद्यालय बालीचौकी के 11 कर्मचारी
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बच्चों की पढ़ाई राम भरोसे, अभिभावकों को सताने लगी भविष्य की चिंता, प्रशासनिक काम भी ठप
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। बालीचौकी स्थित केंद्रीय विद्यालय में 11 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की एक साथ चुनावी ड्यूटी लगाए जाने से विद्यालय की नियमित पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित होने की स्थिति में पहुंच गई है। एक साथ बड़ी संख्या में स्टाफ के चुनावी प्रशिक्षण और मतदान ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका गहरा गई है। इस स्थिति को लेकर स्कूल प्रशासन और स्थानीय अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है कि आखिर इन दिनों पाठ्यक्रम की भरपाई कैसे की जाएगी।
विद्यालय में मुख्य विषयों के शिक्षक (टीचिंग स्टाफ) के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य संभालने वाले गैर-शिक्षण कर्मचारी भी चुनावी ड्यूटी पर लगाए गए हैं। ऐसे में स्टाफ की कमी के कारण शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों के अनुपस्थित रहने से व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना कठिन हो गया है। वहीं, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के चुनावी कार्यों में व्यस्त रहने से दाखिले, अभिलेख प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय अभिभावक संघ ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि चुनावी ड्यूटी के लिए स्कूल स्टाफ का चयन करते समय एक निश्चित कोटा तय किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का पूरा कामकाज बाधित न हो। अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र के बीच में शिक्षकों की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो सकती है।
बॉक्स
विद्यालय के सात प्रवक्ताओं (शिक्षकों) सहित चार अन्य कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगाई गई है। इससे 31 मई तक विद्यालय की पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित रहेंगे। चूंकि यह आदेश चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया है, इसलिए इसका पालन अनिवार्य है। -मेहर चंद, प्रधानाचार्य, केंद्रीय विद्यालय बालीचौकी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। बालीचौकी स्थित केंद्रीय विद्यालय में 11 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की एक साथ चुनावी ड्यूटी लगाए जाने से विद्यालय की नियमित पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित होने की स्थिति में पहुंच गई है। एक साथ बड़ी संख्या में स्टाफ के चुनावी प्रशिक्षण और मतदान ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका गहरा गई है। इस स्थिति को लेकर स्कूल प्रशासन और स्थानीय अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है कि आखिर इन दिनों पाठ्यक्रम की भरपाई कैसे की जाएगी।
विद्यालय में मुख्य विषयों के शिक्षक (टीचिंग स्टाफ) के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य संभालने वाले गैर-शिक्षण कर्मचारी भी चुनावी ड्यूटी पर लगाए गए हैं। ऐसे में स्टाफ की कमी के कारण शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों के अनुपस्थित रहने से व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना कठिन हो गया है। वहीं, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के चुनावी कार्यों में व्यस्त रहने से दाखिले, अभिलेख प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय अभिभावक संघ ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि चुनावी ड्यूटी के लिए स्कूल स्टाफ का चयन करते समय एक निश्चित कोटा तय किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का पूरा कामकाज बाधित न हो। अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र के बीच में शिक्षकों की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो सकती है।
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विद्यालय के सात प्रवक्ताओं (शिक्षकों) सहित चार अन्य कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगाई गई है। इससे 31 मई तक विद्यालय की पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित रहेंगे। चूंकि यह आदेश चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया है, इसलिए इसका पालन अनिवार्य है। -मेहर चंद, प्रधानाचार्य, केंद्रीय विद्यालय बालीचौकी