मंडी। जिला मंडी को वैश्विक निर्यात हब के रूप में विकसित करने के लिए जिला निर्यात कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस योजना के तहत मुख्य फोकस फार्मास्यूटिकल्स, कृषि व कृषि आधारित उत्पादों (फल वाइन सहित), सुगंधित पौधों, हथकरघा एवं हस्तशिल्प और पर्यटन सेवाओं पर रहेगा। हथकरघा एवं हस्तशिल्प की श्रेणी में यहां के प्रसिद्ध शॉल, काष्ठ शिल्प, नक्काशी और धातु शिल्प को विशेष तरजीह दी गई है, जबकि फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) को इस बार फोकस क्षेत्र से बाहर रखने का बड़ा निर्णय लिया गया है।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ. मदन कुमार की अध्यक्षता में हुई जिला निर्यात संवर्धन समिति (डीईपीसी) की बैठक में इस रणनीति को मंजूरी दी गई। डॉ. मदन ने कहा कि मंडी में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें सभी विभागों और स्थानीय उद्यमियों के समन्वित प्रयासों से साकार कर मंडी को एक सशक्त हब बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब आयात निर्यात कोड (आईईसी) मामूली शुल्क पर ऑनलाइन माध्यम से 24 घंटे के भीतर प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन और मुक्त व्यापार समझौतों के लाभ भी समझाए। बैठक में उद्योग केंद्र, बागवानी, पर्यटन विभाग, अग्रणी जिला प्रबंधक और हिमक्राफ्ट के प्रतिनिधियों सहित टेक्सप्रोसिल, एफआईईओ तथा एमएसएमई-डीएफओ सोलन के अधिकारियों और कई प्रमुख निर्यातकों ने हिस्सा लिया।