{"_id":"6a3acc3189de0b394c0e9725","slug":"the-dread-of-the-rains-lives-stranded-on-a-broken-road-mandi-news-c-90-1-mnd1027-201892-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: बरसात का खौफ...टूटी सड़क पर अटकी जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: बरसात का खौफ...टूटी सड़क पर अटकी जिंदगी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मंडी। बालीचौकी का सारली-पंजाई-डोभा मार्ग 200 मीटर हिस्सा पिछली बरसात में क्षतिग्रस्त हुआ था। एक वर्ष बीत जाने बाद भी यह सड़क स्थायी रूप से बहाल नहीं हो पाई है। मानसून नजदीक आते ही सारली-पंजाई-डोभा मार्ग से जुड़े ग्रामीणों की अब फिर चिंता बढ़ गई है। सड़क टूटने की वजह से डोभा, डाहणी और ठाहरी गांवों के करीब 700 परिवारों का जीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।
ग्रामीणों डोला राम, छज्जे राम कपूर, गोपाल कपूर, हेम राज, खेम राज, विजय, रीत लाल, यशवंत कुमार, जसवंत ठाकुर, चेतराम सहित अन्य ने बताया कि अपने घरों तक पहुंचने के लिए आज भी करीब तीन से पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। सड़क की हालत इतनी खस्ता है कि छोटे वाहनों का यहां पहुंचना नामुमकिन है। करीब एक महीना पहले लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग को यातायात के लिए खोला तो था लेकिन सड़क के किनारों पर जमा मलबा हालिया बारिश के कारण दोबारा सड़क पर आ गया है।
लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए 45 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया था लेकिन आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत चार लाख रुपये की ही मंजूरी मिली। यह राशि सड़क को खोलने की अस्थायी कोशिशों में ही खत्म होने के कगार पर है। सड़क बंद होने का सीधा असर क्षेत्र के बागवानों और किसानों पर पड़ रहा है।
विज्ञापन
हाल ही में किसानों को अपनी खुमानी और मटर जैसी नकदी फसलों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए पांच से छह किलोमीटर की सीधी खड़ी चढ़ाई पीठ और घोड़ों पर लादकर तय करनी पड़ी। अब 10 जुलाई से सेब का सीजन शुरू होने वाला है लेकिन अस्थायी व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी मेहनत पर पानी फिरने और भारी घाटे का डर सता रहा है।
सारली-पंजाई-डोभा सड़क को खोलने के लिए जेसीबी मशीन लगाई गई है लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है। बारिश के दौरान फिर से भूस्खलन होने और सड़क बंद होने का खतरा बना हुआ है। इस मार्ग के स्थायी समाधान के लिए इसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के प्रस्ताव में डाला गया है। इसके बाद ही यहां पक्का और स्थायी काम हो पाएगा।
भूपेंद्र शर्मा, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग थलौट मंडल
ग्रामीणों डोला राम, छज्जे राम कपूर, गोपाल कपूर, हेम राज, खेम राज, विजय, रीत लाल, यशवंत कुमार, जसवंत ठाकुर, चेतराम सहित अन्य ने बताया कि अपने घरों तक पहुंचने के लिए आज भी करीब तीन से पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। सड़क की हालत इतनी खस्ता है कि छोटे वाहनों का यहां पहुंचना नामुमकिन है। करीब एक महीना पहले लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग को यातायात के लिए खोला तो था लेकिन सड़क के किनारों पर जमा मलबा हालिया बारिश के कारण दोबारा सड़क पर आ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए 45 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया था लेकिन आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत चार लाख रुपये की ही मंजूरी मिली। यह राशि सड़क को खोलने की अस्थायी कोशिशों में ही खत्म होने के कगार पर है। सड़क बंद होने का सीधा असर क्षेत्र के बागवानों और किसानों पर पड़ रहा है।
हाल ही में किसानों को अपनी खुमानी और मटर जैसी नकदी फसलों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए पांच से छह किलोमीटर की सीधी खड़ी चढ़ाई पीठ और घोड़ों पर लादकर तय करनी पड़ी। अब 10 जुलाई से सेब का सीजन शुरू होने वाला है लेकिन अस्थायी व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी मेहनत पर पानी फिरने और भारी घाटे का डर सता रहा है।
सारली-पंजाई-डोभा सड़क को खोलने के लिए जेसीबी मशीन लगाई गई है लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है। बारिश के दौरान फिर से भूस्खलन होने और सड़क बंद होने का खतरा बना हुआ है। इस मार्ग के स्थायी समाधान के लिए इसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के प्रस्ताव में डाला गया है। इसके बाद ही यहां पक्का और स्थायी काम हो पाएगा।
भूपेंद्र शर्मा, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग थलौट मंडल