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Mandi News: चेक बाउंस के आठ परिवाद खारिज, समय से पहले दायर थीं शिकायतें
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने शनिवार को चेक बाउंस से जुड़े आठ अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए सभी परिवादों को अपोषणीय मानकर खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतें कारण-ए-दावा (कॉज ऑफ एक्शन) उत्पन्न होने से पहले दायर की गई थीं। ऐसे में वे परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत सुनवाई योग्य नहीं हैं।
अदालत के समक्ष आए मामलों में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से नेत्र सिंह के खिलाफ तीन अलग-अलग ऋण खातों से संबंधित परिवाद, श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड का वाहन ऋण मामला, सीडी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी का ऋण विवाद, जेसीबी मशीन के किराये के भुगतान से जुड़ा निजी मामला, मित्र ऋण (फ्रेंडली लोन) का विवाद और हार्डवेयर सामग्री की खरीद के भुगतान से संबंधित परिवाद शामिल थे। सभी मामलों में भुगतान के लिए जारी चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए लेकिन वे अनादरित (बाउंस) हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने कानूनी नोटिस जारी कर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान अधिकांश मामलों में आरोपियों ने यह आपत्ति उठाई कि परिवाद समय से पहले दायर किए गए हैं। अदालत ने रिकॉर्ड, चेक, बैंक रिटर्न मेमो, कानूनी नोटिस, डाक रसीदों और पक्षकारों के बयानों का परीक्षण करने के बाद माना कि रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं हो सका कि वैधानिक अवधि पूरी होने के बाद ही परिवाद दायर किए गए थे। इसलिए शिकायतें कानून की दृष्टि में पोषणीय नहीं मानी जा सकतीं।
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अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत तभी विचारणीय होती है, जब कानूनी नोटिस की वैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद कारण-ए-दावा उत्पन्न हो। चूंकि इन मामलों में यह आवश्यक शर्त पूरी नहीं हुई, इसलिए सभी आठ परिवादों को अपोषणीय मानते हुए खारिज कर दिया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने शनिवार को चेक बाउंस से जुड़े आठ अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए सभी परिवादों को अपोषणीय मानकर खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतें कारण-ए-दावा (कॉज ऑफ एक्शन) उत्पन्न होने से पहले दायर की गई थीं। ऐसे में वे परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत सुनवाई योग्य नहीं हैं।
अदालत के समक्ष आए मामलों में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से नेत्र सिंह के खिलाफ तीन अलग-अलग ऋण खातों से संबंधित परिवाद, श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड का वाहन ऋण मामला, सीडी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी का ऋण विवाद, जेसीबी मशीन के किराये के भुगतान से जुड़ा निजी मामला, मित्र ऋण (फ्रेंडली लोन) का विवाद और हार्डवेयर सामग्री की खरीद के भुगतान से संबंधित परिवाद शामिल थे। सभी मामलों में भुगतान के लिए जारी चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए लेकिन वे अनादरित (बाउंस) हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने कानूनी नोटिस जारी कर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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सुनवाई के दौरान अधिकांश मामलों में आरोपियों ने यह आपत्ति उठाई कि परिवाद समय से पहले दायर किए गए हैं। अदालत ने रिकॉर्ड, चेक, बैंक रिटर्न मेमो, कानूनी नोटिस, डाक रसीदों और पक्षकारों के बयानों का परीक्षण करने के बाद माना कि रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं हो सका कि वैधानिक अवधि पूरी होने के बाद ही परिवाद दायर किए गए थे। इसलिए शिकायतें कानून की दृष्टि में पोषणीय नहीं मानी जा सकतीं।
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अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत तभी विचारणीय होती है, जब कानूनी नोटिस की वैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद कारण-ए-दावा उत्पन्न हो। चूंकि इन मामलों में यह आवश्यक शर्त पूरी नहीं हुई, इसलिए सभी आठ परिवादों को अपोषणीय मानते हुए खारिज कर दिया गया।