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Mandi News: लंबी दूरी की थकान पर आस्था और जुनून भारी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 16 Feb 2026 05:53 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचे देवता राज देवता माधोराय के दरबार में हा
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छोटी काशी में देवी-देवताओं के साथ उमड़ा देवलुओं का हुजूम
सुबह 10 बजे से शुरू हुआ देवी-देवताओं के पहुंचने का सिलसिला
बैसाखियों के सहारे पहुंचे देवता के गूर धर्म चंद
लाइव रिपोर्ट....
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि पर्व में शामिल होने वाले हजारों देवलुओं के चेहरों पर लंबी दूरी की थकान नहीं बल्कि देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था की झलक देखने को मिली। पैदल सफर करने की थकान पर आस्था और जुनून भारी नजर आया। वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर थिरकते देवलुओं में उत्साह इस कदर हावी दिखा, जैसे मानो देवलु बड़ी बेसब्री से इस देव समागम का इंतजार कर रहे थे।
रविवार सुबह 10 बजे से शहर में देवी-देवताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। वाद्य यंत्रों की ध्वनि से समूचा शहर अंधेरा होने तक गूंजता रहा। करनाल, रणसिंघे, शहनाई की गूंज के साथ ढोल नगाड़ा की थाप शहर के चारों कोनों पर गूंजती रही। शहर की हर गली और चौराहे पर किसी न किसी देवी-देवता का आगमन होता रहा। इससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
सराज के तांदी सरोआ क्षेत्र से देव खुड्डी जहल 10:15 बजे बस अड्डा के बाहर पहुंचे। देवता के गूर धर्म चंद एक टांग गवां चुके हैं, लेकिन देवता के प्रति गहरी आस्था के कारण वे बैसाखियों के सहारे देवता के साथ छोटी काशी में पहुंचे। धर्मचंद ने बताया कि पिछले कल यानी शनिवार से देवता मूल स्थान से रवाना हुए हैं।
बॉक्स
मिलन का नजारा अद्भुत और अलौकिक
दूरदराज के क्षेत्र से आने वाले देवी देवताओं के रथ जब आपस में मिलते हैं तो इनके मिलन का नजारा अद्भुत और अलौकिक होता है। पंजीकृत देवी-देवताओं के अलावा ऐसे देवताओं की संख्या भी अधिक रही जो न तो पंजीकृत हैं न ही उनको प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का निमंत्रण दिया गया है। महाशिवरात्रि में अहम स्थान रखने वाले देव मगरू महादेव, देव चपलांदू नाग सबसे अधिक लंबी दूरी पैदल तय कर महाशिवरात्रि में पहुंचे। बल्ह घाटी के बैहना में प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए उनका ठहराव यजमानों के घर पर हुआ। यहां पर देवताओं के रथों का श्रृंगार किया गया। करीब चार बजे दोनों देवता शहर में सैकड़ों देवलुओं के साथ पहुंचे।
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सुबह 10 बजे से शुरू हुआ देवी-देवताओं के पहुंचने का सिलसिला
बैसाखियों के सहारे पहुंचे देवता के गूर धर्म चंद
लाइव रिपोर्ट....
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि पर्व में शामिल होने वाले हजारों देवलुओं के चेहरों पर लंबी दूरी की थकान नहीं बल्कि देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था की झलक देखने को मिली। पैदल सफर करने की थकान पर आस्था और जुनून भारी नजर आया। वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर थिरकते देवलुओं में उत्साह इस कदर हावी दिखा, जैसे मानो देवलु बड़ी बेसब्री से इस देव समागम का इंतजार कर रहे थे।
रविवार सुबह 10 बजे से शहर में देवी-देवताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। वाद्य यंत्रों की ध्वनि से समूचा शहर अंधेरा होने तक गूंजता रहा। करनाल, रणसिंघे, शहनाई की गूंज के साथ ढोल नगाड़ा की थाप शहर के चारों कोनों पर गूंजती रही। शहर की हर गली और चौराहे पर किसी न किसी देवी-देवता का आगमन होता रहा। इससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
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सराज के तांदी सरोआ क्षेत्र से देव खुड्डी जहल 10:15 बजे बस अड्डा के बाहर पहुंचे। देवता के गूर धर्म चंद एक टांग गवां चुके हैं, लेकिन देवता के प्रति गहरी आस्था के कारण वे बैसाखियों के सहारे देवता के साथ छोटी काशी में पहुंचे। धर्मचंद ने बताया कि पिछले कल यानी शनिवार से देवता मूल स्थान से रवाना हुए हैं।
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मिलन का नजारा अद्भुत और अलौकिक
दूरदराज के क्षेत्र से आने वाले देवी देवताओं के रथ जब आपस में मिलते हैं तो इनके मिलन का नजारा अद्भुत और अलौकिक होता है। पंजीकृत देवी-देवताओं के अलावा ऐसे देवताओं की संख्या भी अधिक रही जो न तो पंजीकृत हैं न ही उनको प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का निमंत्रण दिया गया है। महाशिवरात्रि में अहम स्थान रखने वाले देव मगरू महादेव, देव चपलांदू नाग सबसे अधिक लंबी दूरी पैदल तय कर महाशिवरात्रि में पहुंचे। बल्ह घाटी के बैहना में प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए उनका ठहराव यजमानों के घर पर हुआ। यहां पर देवताओं के रथों का श्रृंगार किया गया। करीब चार बजे दोनों देवता शहर में सैकड़ों देवलुओं के साथ पहुंचे।