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फैमिली कोर्ट का फैसला: पत्नी को 4500 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sat, 02 May 2026 12:34 AM IST
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पति के दूसरी महिला के साथ रहने का खुलासा, कोर्ट ने भरण-पोषण को बताया कानूनी दायित्व
संवाद न्यूज एजेंसीमंडी। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय सुंदरनगर की अदालत ने भरण-पोषण के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति को पत्नी को 4500 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए हैं। पत्नी द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत दायर याचिका को अदालत ने आंशिक रूप से स्वीकार किया।
याचिका में कहा गया था कि विवाह 22 अक्तूबर 2013 को हुआ था और दंपति की एक बेटी है। आरोप लगाया गया कि वर्ष 2017 में पति पत्नी और बच्ची को छोड़कर हरियाणा चला गया और तब से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी।
सुनवाई के दौरान पति ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि वह दूसरी महिला के साथ रह रहा है और उससे उसकी एक संतान भी है। साथ ही उसने यह स्वीकार किया कि उसने पत्नी और बेटी को कोई भरण-पोषण नहीं दिया।अदालत ने माना कि पत्नी की सीमित आय और अलग रहना पति की जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता। यह भी पाया गया कि पति पहले नौकरी कर चुका है और कमाने में सक्षम है।
इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने आदेश दिया कि पति पत्नी को 4500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि अदा करे, जो आदेश की तिथि से प्रभावी होगी।
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याचिका में कहा गया था कि विवाह 22 अक्तूबर 2013 को हुआ था और दंपति की एक बेटी है। आरोप लगाया गया कि वर्ष 2017 में पति पत्नी और बच्ची को छोड़कर हरियाणा चला गया और तब से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी।
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सुनवाई के दौरान पति ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि वह दूसरी महिला के साथ रह रहा है और उससे उसकी एक संतान भी है। साथ ही उसने यह स्वीकार किया कि उसने पत्नी और बेटी को कोई भरण-पोषण नहीं दिया।अदालत ने माना कि पत्नी की सीमित आय और अलग रहना पति की जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता। यह भी पाया गया कि पति पहले नौकरी कर चुका है और कमाने में सक्षम है।
इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने आदेश दिया कि पति पत्नी को 4500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि अदा करे, जो आदेश की तिथि से प्रभावी होगी।
