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एरियर के भुगतान के लिए शीघ्र ठोस निर्णय ले सरकार : नरेश
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सुंदरनगर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों और पेंशनरों का लगभग 13 प्रतिशत डीए/डीआर तथा सातवें वेतन आयोग के तहत देय वेतन-पेंशन संशोधन का हजारों करोड़ रुपये का एरियर लंबित रहने का मुद्दा फिर गर्मा गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने सरकार पर कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र भुगतान पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
महासंघ के राज्य अध्यक्ष नरेश ठाकुर ने सुंदरनगर में कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों को देय डीए/डीआर की कई किस्ते लंबे समय से बकाया हैं। इससे लगभग 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन और पेंशन संशोधन का बड़ा हिस्सा आज भी एरियर के रूप में अटका हुआ है, जिससे कर्मचारियों में रोष है।
उन्होंने वित्त विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वेतन-पेंशन संशोधन का एरियर करीब 8500 करोड़ रुपये और डीए/डीआर एरियर लगभग 5000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं की गई है। महासंघ के अध्यक्ष ने कहा कि डीए/डीआर और वेतन एरियर कर्मचारियों के सांविधानिक और वैधानिक अधिकार हैं, जिन्हें बोझ बताकर टालना दुर्भाग्यपूर्ण है।
महासंघ ने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों को प्रदेश की प्रशासनिक रीढ़ मानते हुए लंबित 13 प्रतिशत डीए/डीआर और वेतन संशोधन एरियर के भुगतान पर तुरंत समयबद्ध निर्णय लिया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में लोकतांत्रिक ढंग से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। संवाद
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महासंघ के राज्य अध्यक्ष नरेश ठाकुर ने सुंदरनगर में कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों को देय डीए/डीआर की कई किस्ते लंबे समय से बकाया हैं। इससे लगभग 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन और पेंशन संशोधन का बड़ा हिस्सा आज भी एरियर के रूप में अटका हुआ है, जिससे कर्मचारियों में रोष है।
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उन्होंने वित्त विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वेतन-पेंशन संशोधन का एरियर करीब 8500 करोड़ रुपये और डीए/डीआर एरियर लगभग 5000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं की गई है। महासंघ के अध्यक्ष ने कहा कि डीए/डीआर और वेतन एरियर कर्मचारियों के सांविधानिक और वैधानिक अधिकार हैं, जिन्हें बोझ बताकर टालना दुर्भाग्यपूर्ण है।
महासंघ ने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों को प्रदेश की प्रशासनिक रीढ़ मानते हुए लंबित 13 प्रतिशत डीए/डीआर और वेतन संशोधन एरियर के भुगतान पर तुरंत समयबद्ध निर्णय लिया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में लोकतांत्रिक ढंग से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। संवाद