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Mandi News: तत्तापानी में गर्म पानी के चश्मे होंगे पुनर्जीवित
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करसोग (मंडी)। गर्म पानी के प्राकृतिक चश्मों के लिए मशहूर तत्तापानी अब रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए भी विख्यात हो रहा है। कोलडैम परियोजना के कारण तत्तापानी में बनी झील में कई जलक्रीड़ा गतिविधियां शुरू की गई हैं। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए पानी में अठखेलियां करती मोटर बोट से लेकर जेट स्की और हॉट एयर बैलून जैसी क्रीड़ाएं करवाई जा रही हैं।
हाल ही में राज्य सरकार ने धार्मिक आस्था और विश्वास की इस धरती पर स्थित गर्म पानी के प्राकृतिक चश्मों को पुनर्जीवित करने की पहल की है। साथ ही पहले से मौजूद चश्मों की हालत सुधारने तथा उनमें गर्म पानी उचित मात्रा में उपलब्ध करवाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। इन कार्यों के दृष्टिगत कोलडैम प्रबंधन को विस्तृत डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सतलुज नदी के किनारे स्थित तत्तापानी अपने प्राकृतिक गर्म पानी के चश्मों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां का गंधकयुक्त गर्म पानी औषधीय गुणों से भरपूर है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से चर्म रोग और जोड़ों के दर्द ठीक हो जाते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से कुंभ स्नान के बराबर पुण्य मिलता है। हर वर्ष मकर संक्रांति पर गर्म पानी के चश्मों में हजारों लोग आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं। सूर्य देव के उत्तरायण होने पर यहां मकर संक्रांति उत्सव मनाया जाता है। गर्म पानी के चश्मों में स्नान कर तुलादान करने की परंपरा भी रही है। इससे ग्रह दोष शांत होते हैं।
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यह स्थान धार्मिक आस्था, विश्वास और पर्यटन गतिविधियों का केंद्र बन कर उभरा है। ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि होने, यहां का धार्मिक महत्व, औषधीय गुणों से भरपूर गर्म पानी के चश्मे और झील में आयोजित होने वाली जलक्रीड़ा गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
-प्रेम रैना, सचिव, तत्तापानी वाटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन
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हाल ही में राज्य सरकार ने धार्मिक आस्था और विश्वास की इस धरती पर स्थित गर्म पानी के प्राकृतिक चश्मों को पुनर्जीवित करने की पहल की है। साथ ही पहले से मौजूद चश्मों की हालत सुधारने तथा उनमें गर्म पानी उचित मात्रा में उपलब्ध करवाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। इन कार्यों के दृष्टिगत कोलडैम प्रबंधन को विस्तृत डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सतलुज नदी के किनारे स्थित तत्तापानी अपने प्राकृतिक गर्म पानी के चश्मों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां का गंधकयुक्त गर्म पानी औषधीय गुणों से भरपूर है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से चर्म रोग और जोड़ों के दर्द ठीक हो जाते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से कुंभ स्नान के बराबर पुण्य मिलता है। हर वर्ष मकर संक्रांति पर गर्म पानी के चश्मों में हजारों लोग आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं। सूर्य देव के उत्तरायण होने पर यहां मकर संक्रांति उत्सव मनाया जाता है। गर्म पानी के चश्मों में स्नान कर तुलादान करने की परंपरा भी रही है। इससे ग्रह दोष शांत होते हैं।
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यह स्थान धार्मिक आस्था, विश्वास और पर्यटन गतिविधियों का केंद्र बन कर उभरा है। ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि होने, यहां का धार्मिक महत्व, औषधीय गुणों से भरपूर गर्म पानी के चश्मे और झील में आयोजित होने वाली जलक्रीड़ा गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
-प्रेम रैना, सचिव, तत्तापानी वाटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन
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