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Mandi News: जोगिंद्रनगर आयुर्वेदिक अस्पताल की फार्मेसी में औषधियों का टोटा
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। आयुर्वेदिक उपमंडलीय अस्पताल में लचर स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों के लिए परेशानियों का सबब बनती जा रही है। यहां पर मरीजों के सायंकालीन दाखिले बंद होने के बाद अब आयुर्वेदिक दवा से भी मरीज महरूम हो गए हैं। चार बजे के बाद गंभीर मरीजों को भी अस्पताल से छुट्टी देना चिकित्सकों की मजबूरी बना हुआ है। बीते कई माह से सर्दी, खांसी के लिए काढ़े तक उपमंडलीय अस्पताल में मौजूद नहीं हैं। गले में खरास, फेफड़ों में संक्रमण के लिए रामवाण कहलाए जाने वाले कसाय और औषधीय चूर्ण भी इस अस्पताल में मौजूद नहीं है।
शरीर में दर्द निवारक औषधीय तेल भी मरीजों को उपचार के लिए बाजार से खरीदने पड़े रहे हैं। सीतोपलादी, त्रिफला, अभीपतिकर चूर्ण तक मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। नर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों के पद बीते कई माह से खाली पड़े हैं। मरीजों के खून के टैस्ट की बात करें तो आधुनिक मशीनरी का अभाव भी मरीजों का मर्ज बढ़ा रहा है।
शनिवार को आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मरीजों के उपचार के लिए पहुंचे तीमारदार गौरव, सुकन्या, ममता, बिमला ने बताया कि उन्हें आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार की लचर स्वास्थ्य सेवाओं से मायूसी हाथ लगी है ओपीडी पर विशेषज्ञ चिकित्सक से स्वास्थ्य लाभ तो मिला, लेकिन उन्हें आयुर्वेदिक दवाइयां निजी दुकानों से खरीदनी पड़ी। जहां पर 500 से एक हजार रुपये भी चुकाने पड़े।
बॉक्स
आयुर्वेदिक चिकित्सालय जोगिंद्रनगर में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को डिस्पेंसरी में मौजूद आवश्यक दवाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। कुछ औषधीय काढे़ और चूर्ण की आपूर्ति न होने से यह समस्या पेश आ रही है। नर्सिंग स्टाफ के अभाव के चलते मरीजों के सायंकालीन दाखिले प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन जल्द ही इस समस्या का भी समाधान कर दिया जाएगा।
-डॉ रक्षक पाल, उपमंडलीय आयुष चिकित्साधिकारी जोगिंद्रनगर।
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शरीर में दर्द निवारक औषधीय तेल भी मरीजों को उपचार के लिए बाजार से खरीदने पड़े रहे हैं। सीतोपलादी, त्रिफला, अभीपतिकर चूर्ण तक मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। नर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों के पद बीते कई माह से खाली पड़े हैं। मरीजों के खून के टैस्ट की बात करें तो आधुनिक मशीनरी का अभाव भी मरीजों का मर्ज बढ़ा रहा है।
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शनिवार को आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मरीजों के उपचार के लिए पहुंचे तीमारदार गौरव, सुकन्या, ममता, बिमला ने बताया कि उन्हें आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार की लचर स्वास्थ्य सेवाओं से मायूसी हाथ लगी है ओपीडी पर विशेषज्ञ चिकित्सक से स्वास्थ्य लाभ तो मिला, लेकिन उन्हें आयुर्वेदिक दवाइयां निजी दुकानों से खरीदनी पड़ी। जहां पर 500 से एक हजार रुपये भी चुकाने पड़े।
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आयुर्वेदिक चिकित्सालय जोगिंद्रनगर में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को डिस्पेंसरी में मौजूद आवश्यक दवाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। कुछ औषधीय काढे़ और चूर्ण की आपूर्ति न होने से यह समस्या पेश आ रही है। नर्सिंग स्टाफ के अभाव के चलते मरीजों के सायंकालीन दाखिले प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन जल्द ही इस समस्या का भी समाधान कर दिया जाएगा।
-डॉ रक्षक पाल, उपमंडलीय आयुष चिकित्साधिकारी जोगिंद्रनगर।