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Mandi News: सराज में सेब से जापानी फल की ओर बढ़ा रुझान
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थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र के बागवान सेब की पारंपरिक खेती से निराश होकर जापानी फल की बागवानी अपना रहे हैं। सराज के थुनाग उपमंडल में इस वर्ष 10 हजार से अधिक जापानी फल के पौधे लगाए गए हैं। बगस्याड़, जंजैहली, संगलबाड़ा और ढीम कटारू जैसे सेब-प्रधान इलाकों में अब जापानी फल के बगीचे लगाए जा रहे हैं। धार जरोल, रोड़, चिऊणी, बहलीधार और धरवारथाच में भी जापानी फल के पौधे रोपे जा रहे हैं। यह बदलाव सराज की बागवानी में नया दौर ला रहा है।
बागवानों का कहना है कि सेब की फसल अब खर्चीली हो गई है। मौसम की मार झेलना मुश्किल है और विदेशी सेबों के बढ़ते आयात से स्थानीय सेब को उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। जापानी फल सेब की तुलना में कम लागत वाला और अधिक लाभदायक विकल्प साबित हो रहा है। यह फल हर साल स्थिर उत्पादन देता है। रोग-कीट कम लगते हैं, जिससे कीटनाशकों का खर्च बचता है। बाजार में 250-300 प्रति किलो तो कभी-कभी 175-200 रुपये तक भी तक बिक रहा है।
कुल्लू-मंडी में बागवानी विभाग उच्च गुणवत्ता वाले पौधे वितरित कर रहा है। सराज के बागवान उम्मीद कर रहे हैं कि जापानी फल से उनकी आय बढ़ेगी, जिससे सेब की निर्भरता कम होगी। बागवान चतर सिंह, परमदेव और प्रताप सिंह ने बताया कि सेब की बढ़ती लागत और घटती कीमतों से परेशान अब जापानी फल की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
वर्तमान मौसम अनुकूल है और 15 फरवरी तक नए पौधे लगाए जा सकते हैं। उधर, बागवानी विभाग से सेवानिवृत्त विषयवाद विशेषज्ञ डाॅ. रामनाथ के अनुसार जापानी फल सब तरह के तापमान में उगता है। लोअर हाइट में फसल जल्द तैयार होती है, लेकिन दाम नहीं मिलते। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फसल देरी से आती है इसलिए दाम अच्छे मिलते हैं। उन्होंने बागवानों को जापानी फल का बगीचा पूर्णतया आर्गेनिक तरीके से तैयार करने की सलाह दी है।
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बागवानों का कहना है कि सेब की फसल अब खर्चीली हो गई है। मौसम की मार झेलना मुश्किल है और विदेशी सेबों के बढ़ते आयात से स्थानीय सेब को उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। जापानी फल सेब की तुलना में कम लागत वाला और अधिक लाभदायक विकल्प साबित हो रहा है। यह फल हर साल स्थिर उत्पादन देता है। रोग-कीट कम लगते हैं, जिससे कीटनाशकों का खर्च बचता है। बाजार में 250-300 प्रति किलो तो कभी-कभी 175-200 रुपये तक भी तक बिक रहा है।
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कुल्लू-मंडी में बागवानी विभाग उच्च गुणवत्ता वाले पौधे वितरित कर रहा है। सराज के बागवान उम्मीद कर रहे हैं कि जापानी फल से उनकी आय बढ़ेगी, जिससे सेब की निर्भरता कम होगी। बागवान चतर सिंह, परमदेव और प्रताप सिंह ने बताया कि सेब की बढ़ती लागत और घटती कीमतों से परेशान अब जापानी फल की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
वर्तमान मौसम अनुकूल है और 15 फरवरी तक नए पौधे लगाए जा सकते हैं। उधर, बागवानी विभाग से सेवानिवृत्त विषयवाद विशेषज्ञ डाॅ. रामनाथ के अनुसार जापानी फल सब तरह के तापमान में उगता है। लोअर हाइट में फसल जल्द तैयार होती है, लेकिन दाम नहीं मिलते। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फसल देरी से आती है इसलिए दाम अच्छे मिलते हैं। उन्होंने बागवानों को जापानी फल का बगीचा पूर्णतया आर्गेनिक तरीके से तैयार करने की सलाह दी है।