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Mandi News: सड़कें बंद होने से क्षेत्रीय अस्पताल में घटी ओपीडी
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रोजाना 1200 की जगह 800 से 1000 मरीज ही पहुंच रहे अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। लगातार हो रही बारिश और जगह-जगह भूस्खलन से सड़कें बंद होने का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। जिलेभर से मरीजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण क्षेत्रीय अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल मंडी में ओपीडी में कमी दर्ज की गई है। रोजाना जहां करीब 1200 मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे। वहीं पिछले एक सप्ताह से यह संख्या घटकर 800 से 1000 के बीच रह गई है।
ओपीडी में भीड़ कम होने से मरीजों को पंजीकरण, जांच और विभिन्न चिकित्सकीय परीक्षणों के लिए अधिक इंतजार नहीं करना पड़ रहा। चिकित्सक भी सामान्य दिनों की तुलना में प्रत्येक मरीज को अधिक समय देकर बेहतर जांच और उपचार कर पा रहे हैं। अस्पताल के वार्डों में भी भर्ती मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
सबसे अधिक राहत स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा बाल रोग ओपीडी में देखने को मिल रही है, जहां सामान्य दिनों में मरीजों की लंबी कतारें लगती थीं और बैठने तक की जगह नहीं मिलती थी। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से सड़क संपर्क बाधित होने के कारण लोग जिला अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में ही उपचार ले रहे हैं। हालांकि, बरसात के मौसम में डायरिया, बुखार, पीलिया समेत जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन अभी तक ऐसे मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने कहा कि बरसात के दौरान जलजनित रोगों से बचाव के लिए लोगों को स्वच्छ पानी पीने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। लगातार हो रही बारिश और जगह-जगह भूस्खलन से सड़कें बंद होने का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। जिलेभर से मरीजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण क्षेत्रीय अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल मंडी में ओपीडी में कमी दर्ज की गई है। रोजाना जहां करीब 1200 मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे। वहीं पिछले एक सप्ताह से यह संख्या घटकर 800 से 1000 के बीच रह गई है।
ओपीडी में भीड़ कम होने से मरीजों को पंजीकरण, जांच और विभिन्न चिकित्सकीय परीक्षणों के लिए अधिक इंतजार नहीं करना पड़ रहा। चिकित्सक भी सामान्य दिनों की तुलना में प्रत्येक मरीज को अधिक समय देकर बेहतर जांच और उपचार कर पा रहे हैं। अस्पताल के वार्डों में भी भर्ती मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
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सबसे अधिक राहत स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा बाल रोग ओपीडी में देखने को मिल रही है, जहां सामान्य दिनों में मरीजों की लंबी कतारें लगती थीं और बैठने तक की जगह नहीं मिलती थी। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से सड़क संपर्क बाधित होने के कारण लोग जिला अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में ही उपचार ले रहे हैं। हालांकि, बरसात के मौसम में डायरिया, बुखार, पीलिया समेत जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन अभी तक ऐसे मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने कहा कि बरसात के दौरान जलजनित रोगों से बचाव के लिए लोगों को स्वच्छ पानी पीने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।