{"_id":"6a7465645857a262210152c8","slug":"recruitment-in-the-municipal-corporation-halted-due-to-government-decision-38-posts-vacant-mandi-news-c-90-1-mnd1027-207938-2026-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: सरकार के फैसले से नगर निगम में रुकीं भर्तियां, 38 पद खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: सरकार के फैसले से नगर निगम में रुकीं भर्तियां, 38 पद खाली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंजीनियरिंग और गृहकर शाखा के कर्मचारियों पर बढ़ा बोझ
रिक्त पदों से लगा विकास की बयार पर विराम
पद भरने के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम मंडी में कर्मचारियों की कमी शहर के विकास और प्रशासनिक कार्यों पर भारी पड़ रही है। निगम में 38 से अधिक पद रिक्त होने से दैनिक कामकाज के साथ विकास परियोजनाओं की रफ्तार भी धीमी हो गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब सीएलसी (शहरी आजीविका केंद्र) और आउटसोर्स भर्तियों के लिए प्रदेश सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। महापौर सुमन ठाकुर ने पदभार संभालने के बाद सीएलसी के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती का प्रस्ताव रखा था लेकिन सरकारी मंजूरी की बाध्यता के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
सबसे अधिक असर इंजीनियरिंग शाखा पर पड़ा है। पहले यहां दो सहायक और चार कनिष्ठ अभियंता कार्यरत थे, जबकि अब केवल एक सहायक और दो कनिष्ठ अभियंता ही पूरे शहर का काम संभाल रहे हैं। यही शाखा सड़कों, नालियों, पुलों, स्ट्रीट लाइटों के निर्माण व रखरखाव, नक्शे पास करने और टेंडर प्रक्रिया की जिम्मेदारी निभाती है। स्टाफ की कमी से दो दिन में होने वाले कार्य में अब 10 दिन तक लग रहे हैं। गृहकर शाखा भी केवल दो कर्मचारियों के सहारे चल रही है।
विज्ञापन
पहले नगर निगम हाउस की मंजूरी से डाटा एंट्री ऑपरेटर, कनिष्ठ अभियंता और लिपिकीय स्टाफ की नियुक्तियां कर लेता था लेकिन अब शहरी विकास विभाग और सरकार की मंजूरी के बिना भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है।
महापौर सुमन ठाकुर ने कहा कि रिक्त पद भरने के लिए मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री से मिलने का समय मांगा गया है। पहले निगम अपने स्तर पर भर्तियां कर लेता था लेकिन अब सरकार की मंजूरी का इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
रिक्त पदों से लगा विकास की बयार पर विराम
पद भरने के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम मंडी में कर्मचारियों की कमी शहर के विकास और प्रशासनिक कार्यों पर भारी पड़ रही है। निगम में 38 से अधिक पद रिक्त होने से दैनिक कामकाज के साथ विकास परियोजनाओं की रफ्तार भी धीमी हो गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब सीएलसी (शहरी आजीविका केंद्र) और आउटसोर्स भर्तियों के लिए प्रदेश सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। महापौर सुमन ठाकुर ने पदभार संभालने के बाद सीएलसी के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती का प्रस्ताव रखा था लेकिन सरकारी मंजूरी की बाध्यता के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
विज्ञापन
सबसे अधिक असर इंजीनियरिंग शाखा पर पड़ा है। पहले यहां दो सहायक और चार कनिष्ठ अभियंता कार्यरत थे, जबकि अब केवल एक सहायक और दो कनिष्ठ अभियंता ही पूरे शहर का काम संभाल रहे हैं। यही शाखा सड़कों, नालियों, पुलों, स्ट्रीट लाइटों के निर्माण व रखरखाव, नक्शे पास करने और टेंडर प्रक्रिया की जिम्मेदारी निभाती है। स्टाफ की कमी से दो दिन में होने वाले कार्य में अब 10 दिन तक लग रहे हैं। गृहकर शाखा भी केवल दो कर्मचारियों के सहारे चल रही है।
विज्ञापन
पहले नगर निगम हाउस की मंजूरी से डाटा एंट्री ऑपरेटर, कनिष्ठ अभियंता और लिपिकीय स्टाफ की नियुक्तियां कर लेता था लेकिन अब शहरी विकास विभाग और सरकार की मंजूरी के बिना भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है।
महापौर सुमन ठाकुर ने कहा कि रिक्त पद भरने के लिए मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री से मिलने का समय मांगा गया है। पहले निगम अपने स्तर पर भर्तियां कर लेता था लेकिन अब सरकार की मंजूरी का इंतजार करना पड़ रहा है।