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Mandi News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह माह की कैद, 50 हजार रुपये जुर्माना
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मंडी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-3 मंडी ने चेक बाउंस के एक मामले में बॉबी एंटरप्राइजेज के संचालक मोहम्मद नासिर को दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की पूरी राशि शिकायतकर्ता एसएस ट्रेडर्स की प्रोपराइटर बलवंत कौर को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
अदालत के समक्ष दायर शिकायत के अनुसार रामनगर स्थित एसएस ट्रेडर्स और कनैड स्थित बॉबी एंटरप्राइजेज के बीच जूते-चप्पलों के कारोबार को लेकर व्यावसायिक लेनदेन था। इसी लेनदेन के तहत आरोपी ने 36,444 रुपये का चेक जारी किया था। जब शिकायतकर्ता ने चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो 24 दिसंबर 2020 को वह खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने चेक जारी करने और उस पर हस्ताक्षर करने की बात स्वीकार की, हालांकि उसने दावा किया कि बकाया राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। अदालत ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद पाया कि आरोपी अपने दावे को साबित करने में असफल रहा।
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न्यायालय ने माना कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत अपराध के सभी आवश्यक तत्व सिद्ध हो चुके हैं। अदालत ने जुर्माना 30 दिनों के भीतर जमा करने के निर्देश दिए हैं। भुगतान न होने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त दो माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। हालांकि, अपील दायर करने के लिए सजा पर 30 दिन की रोक लगाते हुए आरोपी को जमानत प्रदान की गई है।
अदालत के समक्ष दायर शिकायत के अनुसार रामनगर स्थित एसएस ट्रेडर्स और कनैड स्थित बॉबी एंटरप्राइजेज के बीच जूते-चप्पलों के कारोबार को लेकर व्यावसायिक लेनदेन था। इसी लेनदेन के तहत आरोपी ने 36,444 रुपये का चेक जारी किया था। जब शिकायतकर्ता ने चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो 24 दिसंबर 2020 को वह खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने चेक जारी करने और उस पर हस्ताक्षर करने की बात स्वीकार की, हालांकि उसने दावा किया कि बकाया राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। अदालत ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद पाया कि आरोपी अपने दावे को साबित करने में असफल रहा।
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