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Mandi News: स्कूलों में नैतिक मूल्यों के पेड़ की छांव में पढ़ेंगे विद्यार्थी
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जीवन मूल्य और व्यावहारिक संस्कारों की भी शिक्षा दी जाएगी
कक्षा में प्रवेश करते ही बच्चों को प्रेरणादायक वातावरण का अनुभव होगा
सुरेंद्र शर्मा
मंडी। जिले के सरकारी स्कूलों में अब विद्यार्थी नैतिक मूल्यों के पेड़ की संस्कारयुक्त छांव में अध्ययन करेंगे। शिक्षा विभाग की नई पहल के तहत विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से स्कूलों में नैतिक मूल्यों के प्रतीकात्मक पेड़ तैयार किए जाएंगे। इन पेड़ों के माध्यम से बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्य और व्यावहारिक संस्कारों की भी शिक्षा दी जाएगी। नैतिक मूल्यों के इस पेड़ में तने, शाखाओं और पत्तों के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सहानुभूति, कृतज्ञता और आत्म-जागरूकता जैसे गुणों का विकास करना है। कक्षा में प्रवेश करते ही बच्चों को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण का अनुभव होगा।
शिक्षा विभाग ने इस पहल के साथ खुशियों का पिटारा और ग्रेटिट्यूड बॉक्स जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया है। इन गतिविधियों के अंतर्गत विद्यार्थी प्रतिदिन अपने जीवन के अच्छे अनुभवों और उन बातों को साझा करेंगे, जिनके लिए वे आभारी महसूस करते हैं। इससे बच्चों में मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन विकसित होने की उम्मीद है।
बदलते समय में बच्चों के सामने बढ़ती भावनात्मक और नैतिक चुनौतियों को देखते हुए विभाग ने सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षा कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य स्तर पर विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम के जिला समन्वयक कर्म सिंह ठाकुर ने बताया कि यह पहल विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के साथ उन्हें जीवन में बेहतर निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेगी।
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कोट्स
यह कार्यक्रम बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास के साथ संवेदनशील, जिम्मेदार और मूल्य-आधारित समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। -मीना राठौर, उपनिदेशक, जिला गुणवत्ता एवं नियंत्रण
कक्षा में प्रवेश करते ही बच्चों को प्रेरणादायक वातावरण का अनुभव होगा
सुरेंद्र शर्मा
मंडी। जिले के सरकारी स्कूलों में अब विद्यार्थी नैतिक मूल्यों के पेड़ की संस्कारयुक्त छांव में अध्ययन करेंगे। शिक्षा विभाग की नई पहल के तहत विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से स्कूलों में नैतिक मूल्यों के प्रतीकात्मक पेड़ तैयार किए जाएंगे। इन पेड़ों के माध्यम से बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्य और व्यावहारिक संस्कारों की भी शिक्षा दी जाएगी। नैतिक मूल्यों के इस पेड़ में तने, शाखाओं और पत्तों के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सहानुभूति, कृतज्ञता और आत्म-जागरूकता जैसे गुणों का विकास करना है। कक्षा में प्रवेश करते ही बच्चों को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण का अनुभव होगा।
शिक्षा विभाग ने इस पहल के साथ खुशियों का पिटारा और ग्रेटिट्यूड बॉक्स जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया है। इन गतिविधियों के अंतर्गत विद्यार्थी प्रतिदिन अपने जीवन के अच्छे अनुभवों और उन बातों को साझा करेंगे, जिनके लिए वे आभारी महसूस करते हैं। इससे बच्चों में मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन विकसित होने की उम्मीद है।
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बदलते समय में बच्चों के सामने बढ़ती भावनात्मक और नैतिक चुनौतियों को देखते हुए विभाग ने सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षा कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य स्तर पर विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम के जिला समन्वयक कर्म सिंह ठाकुर ने बताया कि यह पहल विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के साथ उन्हें जीवन में बेहतर निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेगी।
कोट्स
यह कार्यक्रम बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास के साथ संवेदनशील, जिम्मेदार और मूल्य-आधारित समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। -मीना राठौर, उपनिदेशक, जिला गुणवत्ता एवं नियंत्रण