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Mandi News: आपदा के घाव नहीं भरे, बालीचौकी के किसानों-बागवानों की मुश्किलें बरकरार

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:09 AM IST
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The wounds of the disaster haven't healed, and the hardships of Balichowki's farmers and gardeners persist.
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कारोबार
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मनरेगा और यातायात सुविधा ठप होने से बाजार पड़े सूने
कारोबारियों को बैंकों से लिया लोन चुकाना हुआ मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। छह माह पूर्व आई आपदा ने सराज घाटी के किसानों, बागवानों और आम लोगों पर भारी कहर बरपाया, जिससे वे अभी तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। फसलें नष्ट होने और जमीन बह जाने के कारण किसान और बागवान दोबारा खुद को संभालने में जुटे हैं। मनरेगा कार्य ठप होने और क्षतिग्रस्त सड़कों के चलते यातायात व्यवस्था बहाल न होने से लोगों को रोजगार भी नहीं मिल पा रहा है।

बाजारों तक लोगों की पहुंच बाधित होने से कारोबारियों पर भी मंदी की मार पड़ी है। बालीचौकी क्षेत्र के बाजार सूने हो गए हैं। भूस्खलन की चपेट में आने से कई मकान और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे कारोबारी अब तक संभल नहीं पाए हैं। कारोबार ठप होने के कारण दुकानदारों के लिए बैंकों से लिया गया ऋण चुकाना भी मुश्किल हो गया है।
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बालीचौकी बाजार पर जिला कुल्लू के बंजार सहित सराज घाटी की दर्जनों पंचायतों के लोग निर्भर रहते थे, जो यहां से अपनी दैनिक जरूरतों का सामान खरीदते थे। लेकिन, सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और यातायात सुविधा के अभाव ने कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। आपदा के बाद बाजार में लगभग 40 प्रतिशत ही काम रह गया है। पहले जहां बाजारों में लोगों की भीड़ रहती थी, वहीं अब दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है।

आपदा के बाद बाजार में करीब 40 प्रतिशत काम ही रह गया है। पहले लोगों का बाजारों में जमावड़ा लगा रहता था, लेकिन अब दिनभर सन्नाटा रहता है।
-केसर दास, किराना कारोबारी


ग्रामीण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के बाद से यातायात नियमित नहीं हो पाया है, जिससे लोग बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे। यह भी मंदी का मुख्य कारण है।
-नारायण दास, कारोबारी

सर्दियों में भी लोग खरीदारी के लिए बाजार नहीं पहुंचे। आपदा के बाद कारोबार बढ़ाने के लिए बैंक से लोन लेकर सामान खरीदा था, लेकिन अब मंदी के कारण उसे चुकाना मुश्किल हो गया है। -जोगिंद्र कुमार, टैक्सटाइल कारोबारी
बरसात में किसानों और बागवानों की फसलें खेतों में ही खराब हो गईं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने से लोग खरीदारी नहीं कर पा रहे, जिससे कारोबार पर असर पड़ा है।
-गोकुल, दुकानदार
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