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Mandi News: गृहकर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने बढ़ाई शहरवासियों की चिंता
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चंबा। नगर परिषद की ओर से गृह कर में पांच हजार से एक लाख रुपये तक की बढ़ोतरी का स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने विरोध किया है। शहरवासियों का आरोप है कि नप की ओर से नियमों को दरकिनार कर उनपर जजिया कर लगाकर वसूलने की तैयारी है। नगर परिषद के नए मूल्यांकन के बाद चंबा शहरवासियों का घर अब भारी बोझ बन गया है।
शहरवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से घर बनाए लेकिन अब नगर परिषद के नए आकलन के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे संपत्ति पर उनका अधिकार कम और कर का बोझ ज्यादा हो गया है। कई मध्यवर्गीय और सेवानिवृत्त परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी आर्थिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर रही है। शहरवासियों का आरोप है कि न तो स्पष्ट गणना बताई गई और न ही आपत्ति दर्ज करवाने की पर्याप्त प्रक्रिया समझाई गई। नगर परिषद का दावा है कि निदेशालय की टीम की ओर से वर्ग मीटर के हिसाब से सर्वे किया गया। जिनका मकान बड़ा, उन्हें अधिक गृहकर लगाया जा रहा है और जिनका घर छोटा है, उन्हें पांच सौ से एक हजार तक गृहकर चुकाना होगा।
- नप पूरी तरह से शहरवासियों की खाल निकालने पर उतारू है। नप को ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की गुहार भी लगाई गई लेकिन, कुछ भी नहीं हुआ है। -सुरेश कश्मीरी, समाजसेवी
-पुश्तैनी मकानों में रहना अब नप की नजरों में खटकने लगा है। अत्यधिक गृह कर वसूलने से मुश्किलें बढ़ेंगी। लगता है कि शहरवासियों का अपने मकानों पर अधिकार ही नहीं है। -शादी लाल शर्मा, शहरवासी
-शहर में गृह कर रिवाइज किया जाना है तो उसका एक स्पष्ट फार्मूला होना चाहिए, न कि मनमर्जी करते हुए शहरवासियों पर आर्थिक बोझ डाल देना चाहिए। डीके सोनी, पेंशनर
- बढ़े गृह कर को लेकर नप को नए सिरे से मकान मालिक के समक्ष सर्वेक्षण करवाना चाहिए। इससे शहरवासियों को इस प्रकार के आघात से बचाया जा सकेगा। वीरेंद्र महाजन, प्रधान, व्यापार मंडल चंबा
नप की अध्यक्ष राखी कौशल ने बताया कि शहर में यदि किसी को अपने गृह कर को लेकर संशय हो तो वह नप कार्यालय में आकर उसे दुरुस्त करवा सकते हैं। उन्होंने निदेशालय को नए सिरे से गृह कर के लिए सर्वेक्षण को लेकर पत्र लिखा है।
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शहरवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से घर बनाए लेकिन अब नगर परिषद के नए आकलन के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे संपत्ति पर उनका अधिकार कम और कर का बोझ ज्यादा हो गया है। कई मध्यवर्गीय और सेवानिवृत्त परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी आर्थिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर रही है। शहरवासियों का आरोप है कि न तो स्पष्ट गणना बताई गई और न ही आपत्ति दर्ज करवाने की पर्याप्त प्रक्रिया समझाई गई। नगर परिषद का दावा है कि निदेशालय की टीम की ओर से वर्ग मीटर के हिसाब से सर्वे किया गया। जिनका मकान बड़ा, उन्हें अधिक गृहकर लगाया जा रहा है और जिनका घर छोटा है, उन्हें पांच सौ से एक हजार तक गृहकर चुकाना होगा।
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- नप पूरी तरह से शहरवासियों की खाल निकालने पर उतारू है। नप को ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की गुहार भी लगाई गई लेकिन, कुछ भी नहीं हुआ है। -सुरेश कश्मीरी, समाजसेवी
-पुश्तैनी मकानों में रहना अब नप की नजरों में खटकने लगा है। अत्यधिक गृह कर वसूलने से मुश्किलें बढ़ेंगी। लगता है कि शहरवासियों का अपने मकानों पर अधिकार ही नहीं है। -शादी लाल शर्मा, शहरवासी
-शहर में गृह कर रिवाइज किया जाना है तो उसका एक स्पष्ट फार्मूला होना चाहिए, न कि मनमर्जी करते हुए शहरवासियों पर आर्थिक बोझ डाल देना चाहिए। डीके सोनी, पेंशनर
- बढ़े गृह कर को लेकर नप को नए सिरे से मकान मालिक के समक्ष सर्वेक्षण करवाना चाहिए। इससे शहरवासियों को इस प्रकार के आघात से बचाया जा सकेगा। वीरेंद्र महाजन, प्रधान, व्यापार मंडल चंबा
नप की अध्यक्ष राखी कौशल ने बताया कि शहर में यदि किसी को अपने गृह कर को लेकर संशय हो तो वह नप कार्यालय में आकर उसे दुरुस्त करवा सकते हैं। उन्होंने निदेशालय को नए सिरे से गृह कर के लिए सर्वेक्षण को लेकर पत्र लिखा है।