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Mandi News: चलाहणू में स्मार्ट मीटरों के विरोध में उतरीं महिलाएं
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लडभड़ोल के चलाहणू में स्मार्ट मीटरों के विरोध करती विभिन्न महिला मंडल। संवाद
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लडभड़ोल (मंडी)। हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड की ओर से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों का विरोध अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी जोर पकड़ने लगा है। लडभड़ोल क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में विभिन्न महिला मंडलों ने संयुक्त रूप से मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र के चलाहणू और बनांदर में महिला मंडलों ने शनिवार को सुक्खू सरकार और विद्युत बोर्ड के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथों में तख्तियां लेकर रोष प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला मंडल बनांदर, रथैर और रोपड़ू की सदस्यों ने चलाहणू से लेकर बनांदर तक रैली निकाली।
संयुक्त महिला मंडलों की प्रधान अनीता देवी, रूमली देवी और पवना देवी आदि ग्रामीणों ने कहा कि उनके क्षेत्र में स्मार्ट मीटर न लगाए जाएं। महिलाओं का कहना है कि गांव के अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएं कम पढ़ी-लिखी या अनपढ़ हैं। ऐसे में वे न तो स्मार्ट फोन चलाना जानती हैं और न ही ऑनलाइन बिल भरने में सक्षम हैं।
महिलाओं ने कहा कि उनके परिवार मनरेगा में मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे हैं। घरों में बच्चे पढ़े-लिखे होने के बावजूद बेरोजगार बैठे हैं। ऐसी आर्थिक तंगी के दौर में वे स्मार्ट मीटरों का अतिरिक्त बोझ नहीं उठा सकते। उनका तर्क है कि कई बुजुर्ग ऐसे हैं जो फोन चलाना बिल्कुल नहीं जानते, ऐसे में प्री-पेड या स्मार्ट मीटर व्यवस्था उनके लिए मुसीबत बन जाएगी।
महिला मंडल की सदस्यों ने सरकार से आग्रह किया है कि स्मार्ट मीटर योजना को बंद किया जाए और बिजली बिल की पुरानी व्यवस्था ही रहने दी जाए। उन्होंने कहा कि गरीब जनता की इन व्यावहारिक समस्याओं को अनदेखा न किया जाए और उन पर जबरन स्मार्ट मीटर न थोपे जाएं। संवाद
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संयुक्त महिला मंडलों की प्रधान अनीता देवी, रूमली देवी और पवना देवी आदि ग्रामीणों ने कहा कि उनके क्षेत्र में स्मार्ट मीटर न लगाए जाएं। महिलाओं का कहना है कि गांव के अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएं कम पढ़ी-लिखी या अनपढ़ हैं। ऐसे में वे न तो स्मार्ट फोन चलाना जानती हैं और न ही ऑनलाइन बिल भरने में सक्षम हैं।
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महिलाओं ने कहा कि उनके परिवार मनरेगा में मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे हैं। घरों में बच्चे पढ़े-लिखे होने के बावजूद बेरोजगार बैठे हैं। ऐसी आर्थिक तंगी के दौर में वे स्मार्ट मीटरों का अतिरिक्त बोझ नहीं उठा सकते। उनका तर्क है कि कई बुजुर्ग ऐसे हैं जो फोन चलाना बिल्कुल नहीं जानते, ऐसे में प्री-पेड या स्मार्ट मीटर व्यवस्था उनके लिए मुसीबत बन जाएगी।
महिला मंडल की सदस्यों ने सरकार से आग्रह किया है कि स्मार्ट मीटर योजना को बंद किया जाए और बिजली बिल की पुरानी व्यवस्था ही रहने दी जाए। उन्होंने कहा कि गरीब जनता की इन व्यावहारिक समस्याओं को अनदेखा न किया जाए और उन पर जबरन स्मार्ट मीटर न थोपे जाएं। संवाद
