Kangra: 38 साल की मां सुमना देवी की गुहार- मुझे मृत नहीं, हकदार समझिए सरकार; जानें पूरा मामला
38 वर्षीय सुमना देवी को मुख्यमंत्री महिला सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 1500 रुपये की मासिक सहायता से वंचित होना पड़ रहा है।
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मैं अभी जिंदा हूं, मुझे जबरदस्ती कागजों में मृत मत बनाइए। सरकार मुझे न्याय दे, ताकि 1500 रुपये की मासिक सहायता से मेरे बेटे की पढ़ाई और पालन-पोषण में कुछ मदद मिल सके। यह पीड़ा उस बेबस मां की है, जिसे सरकारी पोर्टल ने कागजों में मृत घोषित कर दिया है। मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के जवाली उपमंडल की ग्राम पंचायत नियांगल (गांव बाड़ा) का है, जहां 38 वर्षीय सुमना देवी को मुख्यमंत्री महिला सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 1500 रुपये की मासिक सहायता से वंचित होना पड़ रहा है। ऑनलाइन सत्यापन के दौरान आ रही इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनका आवेदन पत्र आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
दो अन्य बैंकों में नए खाते खुलवाए, लेकिन पोर्टल पर डेड केस का स्टेटस नहीं बदला
हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़िता ने दो अन्य बैंकों में नए खाते भी खुलवाए, लेकिन इसके बाद भी पोर्टल पर डेड केस का स्टेटस नहीं बदला। अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाली सुमना देवी का जीवन शुरुआत से ही काफी संघर्षपूर्ण रहा है। कम उम्र में विवाह, पति से तलाक के बाद वह अपने 14 वर्षीय बेटे का अकेले पालन-पोषण कर रही हैं। अत्यंत गरीब परिवार से संबंध रखने के बावजूद उनके पास न तो रहने के लिए पक्का मकान है, न ही अंत्योदय राशन कार्ड और न ही किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ मिल पा रहा है।
पंचायत सचिव ने ये कहा
अपने और बच्चे के गुजर-बसर के लिए वह रोजाना करीब 10 किमी पैदल चलकर कोटला में दिहाड़ी-मजदूरी करती हैं। इसके बाद रात के समय लोगों के कपड़ों की तुरपाई कर किसी तरह घर का खर्च चलाती हैं। उधर, पंचायत सचिव हरबंस लाल ने बताया कि मुख्यमंत्री महिला सम्मान निधि योजना के तहत आवेदन करते समय बैंक डिटेल सत्यापन के दौरान पोर्टल पर बार-बार डेड केस का मैसेज आ रहा है। इससे डाटा सेव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी रिपोर्ट खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) जवाली को भेज दी गई है। प्रथम दृष्टया यह किसी तकनीकी त्रुटि का मामला लगता है, जिसे संबंधित विभाग के माध्यम से जल्द ठीक करवाने का प्रयास किया जा रहा है।