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Rampur Bushahar News: निचले क्षेत्रों में सेब पर फूल आने की शुरुआत, रोग नियंत्रण के लिए अहम समय
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फूल आने के समय सेब के पौधे रोगों और कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील
बागवानों की अनदेखी बढ़ा सकती है मार्सोनिना, अल्टरनेरिया और माइट रोग का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। निचले क्षेत्रों में सेब के पेड़ों पर फूल निकलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार इन क्षेत्रों में करीब 30 प्रतिशत तक फूल खिल चुके हैं, जिससे यह समय बागवानों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बन गया है। इस चरण में सही देखभाल की गई और रोग नियंत्रण उपाय अपनाए जाएं, तो बेहतर उत्पादन की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि फूल आने के समय सेब के पेड़ फफूंदजनित रोगों और कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। विशेष रूप से मार्सोनिना, अल्टरनेरिया और माइट का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह फूलों और बाद में फल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार बागवानों को चाहिए कि वे नियमित रूप से अपने बगीचों का निरीक्षण करें और रोग या कीट के शुरुआती लक्षण दिखते ही दवाइयों का छिड़काव करें। बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि दवाइयों का छिड़काव सुबह और शाम के समय किया जाए ताकि इसका अधिकतम प्रभाव हो और फूलों को नुकसान न पहुंचे। साथ ही, मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही स्प्रे किया जाना चाहिए, क्योंकि बारिश या तेज धूप के दौरान छिड़काव का असर कम हो सकता है। इसके अलावा, बागवानों को संतुलित पोषण पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। पौधों को पर्याप्त सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध करवाने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और फूलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों से अपील की है कि वे विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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बागवानों की अनदेखी बढ़ा सकती है मार्सोनिना, अल्टरनेरिया और माइट रोग का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। निचले क्षेत्रों में सेब के पेड़ों पर फूल निकलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार इन क्षेत्रों में करीब 30 प्रतिशत तक फूल खिल चुके हैं, जिससे यह समय बागवानों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बन गया है। इस चरण में सही देखभाल की गई और रोग नियंत्रण उपाय अपनाए जाएं, तो बेहतर उत्पादन की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि फूल आने के समय सेब के पेड़ फफूंदजनित रोगों और कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। विशेष रूप से मार्सोनिना, अल्टरनेरिया और माइट का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह फूलों और बाद में फल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार बागवानों को चाहिए कि वे नियमित रूप से अपने बगीचों का निरीक्षण करें और रोग या कीट के शुरुआती लक्षण दिखते ही दवाइयों का छिड़काव करें। बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि दवाइयों का छिड़काव सुबह और शाम के समय किया जाए ताकि इसका अधिकतम प्रभाव हो और फूलों को नुकसान न पहुंचे। साथ ही, मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही स्प्रे किया जाना चाहिए, क्योंकि बारिश या तेज धूप के दौरान छिड़काव का असर कम हो सकता है। इसके अलावा, बागवानों को संतुलित पोषण पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। पौधों को पर्याप्त सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध करवाने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और फूलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों से अपील की है कि वे विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।