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Rampur Bushahar News: रामपुर, दत्तनगर, निरथ और बायल में सीटू कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा
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रामपुर के चौधरी अड्डे में विरोध प्रदर्शन करते सीटू कार्यकर्ता। संवाद
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रामपुर, दत्तनगर, निरथ और बायल में सीटू कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा
. एनसीआर क्षेत्र में मजदूरों के साथ हो रहे अत्याचार को लेकर जताया रोष
. जल्द हो भारतीय श्रम सम्मेलन, 26 हजार रुपये दी जाए न्यूनतम मजदूरी : कुलदीप
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मजदूरों के साथ हो रहे अत्याचार के विरोध में वीरवार को सीटू कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोला। कार्यकर्ताओं ने रामपुर, दत्तनगर, निरथ और बायल में प्रदर्शनकर भाजपा सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोला और जमकर नारेबाजी की। सीटू की क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर ने मजदूरों के संघर्षों पर किए जा रहे बर्बर दमन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किए। सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा, राहुल विद्यार्थी, राजपाल, मंजीत, राज, संजीव, प्रमोद, देवेंद्र, आशा, ललिता, सुनमणि और मिलाप नेगी ने प्रदर्शनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक औद्योगिक विवाद नहीं, यह प्रत्यक्ष वर्ग संघर्ष की एक साहसिक अभिव्यक्ति है। इसमें राज्य तंत्र खुले तौर पर कॉर्पोरेट हितों की रक्षा करते हुए मजदूरों के अधिकारों को कुचलने में लगा है। उन्होंने औद्योगिक मजदूरों से एकजुटता से डटे रहने, व्यापक देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने और अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर न्यायसंगत मांगों को उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह एक व्यापक राष्ट्रीय संघर्ष लहर का हिस्सा है। इसी बढ़ती एकता ने उत्तर प्रदेश सरकार को जल्दबाजी में वेतन संशोधन की घोषणा करने के लिए मजबूर किया है, जो साबित करता है कि संघर्ष से ही परिणाम मिलते हैं। संकट के केंद्र में ठेका मजदूरों का निर्मम शोषण हो रहा है। बहुप्रचारित श्रम संहिताएं पूरी तरह उजागर हो चुकी हैं,। ये शोषण को वैध बनाने के औजार हैं, जो काम के घंटों को बढ़ाती हैं, अधिकारों को कमजोर करती हैं और ठेका प्रथा को संस्थागत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि सीटू संघर्षरत मजदूरों के साथ दृढ़ता से खड़ा है। सभी गिरफ्तार मजदूरों और कार्यकर्ताओं की तत्काल बिना शर्त रिहाई, सभी झूठे मामलों की वापसी, दमन की समाप्ति और सभी अवैध हिरासतों को खत्म करने की मांग करता है। साथ ही ट्रेड यूनियनों के साथ तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता, भारतीय श्रम सम्मेलन का शीघ्र आयोजन, 26 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी का क्रियान्वयन पूर्ण वैधानिक लाभों के साथ, सख्त 8 घंटे का कार्य दिवस, डबल ओवरटाइम भुगतान, कार्यस्थल सुरक्षा सुनिश्चित करने, ठेका मजदूरों के साथ समान व्यवहार, सस्ती एलपीजी और ठेका श्रम व्यवस्था के उन्मूलन हेतु नियमितीकरण की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मजदूरों के साथ हो रहे अत्याचार के विरोध में वीरवार को सीटू कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोला। कार्यकर्ताओं ने रामपुर, दत्तनगर, निरथ और बायल में प्रदर्शनकर भाजपा सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोला और जमकर नारेबाजी की। सीटू की क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर ने मजदूरों के संघर्षों पर किए जा रहे बर्बर दमन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किए। सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा, राहुल विद्यार्थी, राजपाल, मंजीत, राज, संजीव, प्रमोद, देवेंद्र, आशा, ललिता, सुनमणि और मिलाप नेगी ने प्रदर्शनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक औद्योगिक विवाद नहीं, यह प्रत्यक्ष वर्ग संघर्ष की एक साहसिक अभिव्यक्ति है। इसमें राज्य तंत्र खुले तौर पर कॉर्पोरेट हितों की रक्षा करते हुए मजदूरों के अधिकारों को कुचलने में लगा है। उन्होंने औद्योगिक मजदूरों से एकजुटता से डटे रहने, व्यापक देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने और अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर न्यायसंगत मांगों को उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह एक व्यापक राष्ट्रीय संघर्ष लहर का हिस्सा है। इसी बढ़ती एकता ने उत्तर प्रदेश सरकार को जल्दबाजी में वेतन संशोधन की घोषणा करने के लिए मजबूर किया है, जो साबित करता है कि संघर्ष से ही परिणाम मिलते हैं। संकट के केंद्र में ठेका मजदूरों का निर्मम शोषण हो रहा है। बहुप्रचारित श्रम संहिताएं पूरी तरह उजागर हो चुकी हैं,। ये शोषण को वैध बनाने के औजार हैं, जो काम के घंटों को बढ़ाती हैं, अधिकारों को कमजोर करती हैं और ठेका प्रथा को संस्थागत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि सीटू संघर्षरत मजदूरों के साथ दृढ़ता से खड़ा है। सभी गिरफ्तार मजदूरों और कार्यकर्ताओं की तत्काल बिना शर्त रिहाई, सभी झूठे मामलों की वापसी, दमन की समाप्ति और सभी अवैध हिरासतों को खत्म करने की मांग करता है। साथ ही ट्रेड यूनियनों के साथ तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता, भारतीय श्रम सम्मेलन का शीघ्र आयोजन, 26 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी का क्रियान्वयन पूर्ण वैधानिक लाभों के साथ, सख्त 8 घंटे का कार्य दिवस, डबल ओवरटाइम भुगतान, कार्यस्थल सुरक्षा सुनिश्चित करने, ठेका मजदूरों के साथ समान व्यवहार, सस्ती एलपीजी और ठेका श्रम व्यवस्था के उन्मूलन हेतु नियमितीकरण की मांग की है।
