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Rampur Bushahar News: कम फ्लावरिंग से मायूसी, बागवानों ने घटाए टॉनिक और दवाइयों के छिड़काव

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 11:58 PM IST
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इस वर्ष सेब की कम पैदावार का असर अब बागवानी कार्यों पर नजर आने लगा
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। इस वर्ष सेब की कम पैदावार का असर अब बागवानी कार्यों पर भी नजर आने लगा है। कम फ्लावरिंग से बागवानों में मायूसी है। इस बार कम सेब उत्पादन की आशंका के चलते बागवानों ने दवाइयों के छिड़काव की मात्रा में कम कर दी है, जिससे बगीचों में होने वाली गतिविधियों का स्वरूप बदल गया है। पहले जहां बागवान बेहतर गुणवत्ता और आकार के लिए विभिन्न प्रकार के टॉनिक, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स और कीटनाशकों का नियमित छिड़काव करते थे। इस बार खर्च कम रखने के लिए केवल आवश्यक छिड़काव तक ही सीमित रह गए हैं। अब अधिकतर बागवान पत्तों की सुरक्षा और रोग नियंत्रण पर ही ध्यान दे रहे हैं, जबकि फल वृद्धि से जुड़े अतिरिक्त छिड़काव लगभग बंद कर दिए गए हैं। स्थानीय बागवान विजय कुमार, संदीप, सौरभ चौहान, हैप्पी बराठा और रमन डोगरा ने बताया कि इस सीजन में उन्होंने अभी तक केवल एक बार ही टीएसओ का छिड़काव किया है। इसके अलावा किसी अन्य प्रकार का अतिरिक्त छिड़काव नहीं किया गया, जिससे लागत को नियंत्रित किया जा सके। कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। खराब मौसम, ओलावृष्टि और कम फ्लाॅवरिंग के कारण पहले ही उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर अब बागवानी प्रबंधन पर पड़ रहा है। बागवानों में इस सीजन को लेकर निराशा का माहौल है।
छिड़काव को नजर अंदाज करना नुकसानदेह
जिला कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी एवं विशेषज्ञ डाॅ. उषा शर्मा का कहना है कि भले ही इस वर्ष उत्पादन कम हो, लेकिन आवश्यक छिड़काव को पूरी तरह नजर अंदाज करना भविष्य में नुकसानदेह साबित हो सकता है। उनका सुझाव है कि स्कैब, एफिड और अन्य फंगस रोगों से बचाव के लिए न्यूनतम आवश्यक छिड़काव जरूर किया जाना चाहिए। कम फसल के बावजूद पौधों का स्वास्थ्य बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही अगले सीजन की फसल की नींव तय करता है। संतुलित पोषण और रोग नियंत्रण पर ध्यान न देने से आने वाले वर्षों में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
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