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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के मामले में दोषी को एक साल का कारावास
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अदालत ने 10.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के मामले में रोहड़ू की अदालत ने दोषी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 10.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
दर्शन दास ने दिसंबर 2022 में बलवंत को घर की छत लगाने के लिए 10 लाख रुपये उधार दिए थे। इस कर्ज के भुगतान के लिए बलवंत ने सितंबर 2023 में 10 लाख रुपये का चेक दिया था। यह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद दर्शन दास ने बलवंत को कानूनी नोटिस भेजा। बलवंत को नोटिस मिला, लेकिन उसने 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रोहड़ू की अदालत ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी पाया।
आरोपी ने अदालत में तर्क दिया कि उसने केवल 3.30 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने एक लाख रुपये चुकाने का भी दावा किया। बलवंत ने यह भी कहा कि चेक खाली दिया गया था और उसका दुरुपयोग किया गया। हालांकि, अदालत ने इन दावों को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि बलवंत ने आंशिक भुगतान का कोई प्रमाण नहीं दिया। आरोपी के वकील ने शिकायतकर्ता की वित्तीय क्षमता पर सवाल उठाया। शिकायतकर्ता ने बताया कि यह राशि उनकी पत्नी की जमीन बेचने से मिली थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी ने चेक के दुरुपयोग की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। कानूनी नोटिस का जवाब न देना भी आरोपी के खिलाफ गया। अदालत ने सभी सबूतों के आधार पर बलवंत को दोषी ठहराया।
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रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के मामले में रोहड़ू की अदालत ने दोषी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 10.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
दर्शन दास ने दिसंबर 2022 में बलवंत को घर की छत लगाने के लिए 10 लाख रुपये उधार दिए थे। इस कर्ज के भुगतान के लिए बलवंत ने सितंबर 2023 में 10 लाख रुपये का चेक दिया था। यह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद दर्शन दास ने बलवंत को कानूनी नोटिस भेजा। बलवंत को नोटिस मिला, लेकिन उसने 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रोहड़ू की अदालत ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी पाया।
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आरोपी ने अदालत में तर्क दिया कि उसने केवल 3.30 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने एक लाख रुपये चुकाने का भी दावा किया। बलवंत ने यह भी कहा कि चेक खाली दिया गया था और उसका दुरुपयोग किया गया। हालांकि, अदालत ने इन दावों को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि बलवंत ने आंशिक भुगतान का कोई प्रमाण नहीं दिया। आरोपी के वकील ने शिकायतकर्ता की वित्तीय क्षमता पर सवाल उठाया। शिकायतकर्ता ने बताया कि यह राशि उनकी पत्नी की जमीन बेचने से मिली थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी ने चेक के दुरुपयोग की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। कानूनी नोटिस का जवाब न देना भी आरोपी के खिलाफ गया। अदालत ने सभी सबूतों के आधार पर बलवंत को दोषी ठहराया।
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