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मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर रही सरकार : यूनियन

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 02 May 2026 11:55 PM IST
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demands of association
बिथल में आयोजित अदानी एग्री फ्रेश वर्करज यूनियन सम्मेलन में मौजूद कार्यकर्ता। स्रोत: यूनियन 
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बिथल में आयोजित सम्मेलन में कामगारों ने उठाए मुद्दे
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कपिल को सौंपा अदानी एग्री फ्रेश वर्कर यूनियन बिथल का जिम्मा

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। अदानी एग्री फ्रेश वर्कर्स यूनियन का छठा सम्मेलन बिथल में हुआ। सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों पर मंथन किया गया। 13 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। कपिल को अध्यक्ष की कमान सौंपी गई। सुनील को महासचिव चुना गया। इसके अलावा संजीव भगेट, सुनील जिष्टू, हरीश चौहान, जसवीर, राकेश, हेमराज, अरुण, अजय, संजीव जिष्ट और संजय को सदस्य नियुक्त किया।
सम्मेलन में हिमाचल किसान सभा के महासचिव राकेश सिंघा, सीटू जिला शिमला के अध्यक्ष कुलदीप और एसएफआई रामपुर इकाई के सचिव राहुल विद्यार्थी विशेष रूप से मौजूद रहे। सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा ने कि कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए मजदूरों, किसानों और आम जनता विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। आम जनता के अधिकारों को कुचला जा रहा है।
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राकेश सिंघा ने कहा कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति कोड 2020 सुरक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर कोड कई क्षेत्रों को न्यूनतम मानकों से बाहर रखता है। अनेक प्रावधानों को नियमों अथवा अधिसूचनाओं पर निर्भर बना देता है, जिससे खदान, निर्माण, कारखानों में काम करने वालों की सुरक्षा वास्तविकता में न के बराबर रह सकती है। लोकतांत्रिक अधिकारों और संगठन पर हमला बढ़ता है। ट्रेड यूनियनों की मान्यता, हड़ताल का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी और मजदूर नियोक्ता विवादों के निपटारे की समय-सीमा जैसी बातों को इस तरह बदला गया है कि यूनियनों की ताकत घटे और प्रबंधन का नियंत्रण बढ़े।

कहा कि मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने वाले मनरेगा कानून को खत्म करने के लिए लाए गए वीबीजीरामजी विधेयक जिसे जल्दबाजी में संसद में पास किया, ग्रामीण मजदूर विरोधी फैसला है। इसमें उनके कानूनी अधिकार को अब मिशन में बदल दिया है। चारों लेबर कोडों से भारत के मजदूरों पर अस्थिर रोजगार, कम वेतन, कमजोर सामाजिक सुरक्षा का चौतरफा हमला होगा। उन्होंने मांग की है कि इन कोडों को तत्काल वापस लिया जाए। पुराने श्रम कानूनों को बहाल कर मजदूरों के हित में वैज्ञानिक संशोधन किए जाएं और भारतीय श्रम सम्मेलन सहित सभी प्रतिनिधि मंचों पर व्यापक चर्चा के बाद ही कोई भी श्रम सुधार लागू किया जाए।
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