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Rampur Bushahar News: आठ हजार फीट ऊंची चोटी पर काओबिल में मनाया दुर्गा मेला
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15/20 घाटी के दुर्गा माता मंदिर काओबिल में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
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रथ में सवार होकर मेले में पहुंचे देवता कंसर और देवता नाग
भक्तों ने भंडारा बनाकर मिलकर खाया, नाटी भी डाली
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। उपमंडल रामपुर के दुर्गम क्षेत्र 15/20 के काओबिल की करीब आठ हजार फीट ऊंची चोटी पर दुर्गा माता के मंदिर में एक दिवसीय ऐतिहासिक मेला धूमधाम से मनाया गया। रामनवमी पर आयोजित मेले में काओबिल के देवता कंसर और देवता नाग रथ में सवार होकर पहुंचे। इस मेले में 15/20 क्षेत्र की सात पंचायतों के लोग पहुंचे। सड़क से काफी दूर पहुंचने पर लोगों ने माता रानी के दर्शन किए और वहां भंडारा बनाकर सभी ने मिलकर खाया। भंडारे के समापन के बाद पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ पहले देवता ने नाटी लगाई और फिर ग्रामीणों ने नाटी डाली। लोकगीतों और वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर पुरुष और महिलाओं ने आठ हजार फीट की चोटी पर जमकर नाटी डाली। दुर्गा मंदिर कमेटी काओबिल के प्रधान देवी दास मेहता ने बताया दुर्गा माता का मंदिर भारी भरकम पत्थर की चट्टान पर बना है। यहां का दुर्गा मेला सदियों से मनाया जाता है। ऐतिहासिक मेला में कंसर और नाग देवता भी वर्ष में एक बार मेले को दुर्गा माता के मंदिर पहुंचते हैं। 15/20 क्षेत्र के ग्रामीण भी हर साल मेले में दूरदराज से पैदल चढ़ाई चढ़कर पहुंचते हैं। मंदिर कमेटी जनता के सहयोग से सभी के लिए भंडारे का आयोजन करवाती है। मोलगी गांव के शिव सिंह टोलटा ने बताया कि क्षेत्र की जनता वाद्ययंत्रों के साथ पहाड़ी नाटी डालकर मेले को धूमधाम से मनाते हैं। करीब आठ हजार फीट की चोटी में बने खूबसूरत मंदिर के प्रांगण में नाचने का अलग ही आनंद मिलता है। कमेटी के सचिव यशपाल कोषाध्यक्ष कृष्ण टोलटा सहित काओबिल की जनता ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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भक्तों ने भंडारा बनाकर मिलकर खाया, नाटी भी डाली
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ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। उपमंडल रामपुर के दुर्गम क्षेत्र 15/20 के काओबिल की करीब आठ हजार फीट ऊंची चोटी पर दुर्गा माता के मंदिर में एक दिवसीय ऐतिहासिक मेला धूमधाम से मनाया गया। रामनवमी पर आयोजित मेले में काओबिल के देवता कंसर और देवता नाग रथ में सवार होकर पहुंचे। इस मेले में 15/20 क्षेत्र की सात पंचायतों के लोग पहुंचे। सड़क से काफी दूर पहुंचने पर लोगों ने माता रानी के दर्शन किए और वहां भंडारा बनाकर सभी ने मिलकर खाया। भंडारे के समापन के बाद पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ पहले देवता ने नाटी लगाई और फिर ग्रामीणों ने नाटी डाली। लोकगीतों और वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर पुरुष और महिलाओं ने आठ हजार फीट की चोटी पर जमकर नाटी डाली। दुर्गा मंदिर कमेटी काओबिल के प्रधान देवी दास मेहता ने बताया दुर्गा माता का मंदिर भारी भरकम पत्थर की चट्टान पर बना है। यहां का दुर्गा मेला सदियों से मनाया जाता है। ऐतिहासिक मेला में कंसर और नाग देवता भी वर्ष में एक बार मेले को दुर्गा माता के मंदिर पहुंचते हैं। 15/20 क्षेत्र के ग्रामीण भी हर साल मेले में दूरदराज से पैदल चढ़ाई चढ़कर पहुंचते हैं। मंदिर कमेटी जनता के सहयोग से सभी के लिए भंडारे का आयोजन करवाती है। मोलगी गांव के शिव सिंह टोलटा ने बताया कि क्षेत्र की जनता वाद्ययंत्रों के साथ पहाड़ी नाटी डालकर मेले को धूमधाम से मनाते हैं। करीब आठ हजार फीट की चोटी में बने खूबसूरत मंदिर के प्रांगण में नाचने का अलग ही आनंद मिलता है। कमेटी के सचिव यशपाल कोषाध्यक्ष कृष्ण टोलटा सहित काओबिल की जनता ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।