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किसान से सिर्फ बीस लीटर दूध खरीद की नीति पशु पालक विरोधी : कौल सिंह
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कहा-सरकार के फैसले से पशुपालकों की घटेगी आमदनी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सरकार के 20 लीटर दूध खरीद सीमा पर बवाल मचना शुरू हो गया है। सरकार के इस फरमान के बाद रोष बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेता कौल सिंह नेगी ने कांग्रेस सरकार और मिल्कफेड की हर किसान से सिर्फ 20 लीटर दूध खरीद नीति को पशु पालक विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि पशुपालक पहले ही दूध की पेमेंट समय पर न मिलने से परेशान हैं। वहीं, सरकार और मिल्कफेड अब दूध खरीद की मात्रा तय करने पर विचार कर पशुपालकों के साथ अन्याय कर उन्हें धोखा देने का काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत पशुधन ही है। ऐसे में कई पशुपालकों ने अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए एक से अधिक गाय पाली है, जिनके पास ज्यादा गाय होगी, उनके पास दूध भी ज्यादा मात्रा में होगा। उनके बचे हुए दूध का क्या होगा। कई लोगों ने बैंक से ऋण लेकर गाय खरीदी है। पशुपालकों को आर्थिक खामियाजा उठाना पड़ेगा। गाय के चारे, चोकर, दवाई और उसके देखभाल के खर्च की व्यवस्था करना चुनौती होगा। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशु पालकों की आर्थिकी को मजबूत करने के बड़े बड़े वादे किए थे। 80 और 100 रुपये प्रति लीटर दूध खरीदने की बात कही थी। दो रुपये किलो गोबर खरीदने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार का पशुपालक विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान न होने और खरीदारी की सीमा तय करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब वादों से मुकर रही है। उन्होंने आग्रह किया है कि सरकार और मिल्कफेड आने वाले समय में पशुपालकों से 20 लीटर तय सीमा में दूध खरीद की नीति को लागू न करे। समय पर दूध भुगतान और पशु औषधालय में रिक्त पदों को भरें।
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रामपुर बुशहर। सरकार के 20 लीटर दूध खरीद सीमा पर बवाल मचना शुरू हो गया है। सरकार के इस फरमान के बाद रोष बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेता कौल सिंह नेगी ने कांग्रेस सरकार और मिल्कफेड की हर किसान से सिर्फ 20 लीटर दूध खरीद नीति को पशु पालक विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि पशुपालक पहले ही दूध की पेमेंट समय पर न मिलने से परेशान हैं। वहीं, सरकार और मिल्कफेड अब दूध खरीद की मात्रा तय करने पर विचार कर पशुपालकों के साथ अन्याय कर उन्हें धोखा देने का काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत पशुधन ही है। ऐसे में कई पशुपालकों ने अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए एक से अधिक गाय पाली है, जिनके पास ज्यादा गाय होगी, उनके पास दूध भी ज्यादा मात्रा में होगा। उनके बचे हुए दूध का क्या होगा। कई लोगों ने बैंक से ऋण लेकर गाय खरीदी है। पशुपालकों को आर्थिक खामियाजा उठाना पड़ेगा। गाय के चारे, चोकर, दवाई और उसके देखभाल के खर्च की व्यवस्था करना चुनौती होगा। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशु पालकों की आर्थिकी को मजबूत करने के बड़े बड़े वादे किए थे। 80 और 100 रुपये प्रति लीटर दूध खरीदने की बात कही थी। दो रुपये किलो गोबर खरीदने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार का पशुपालक विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान न होने और खरीदारी की सीमा तय करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब वादों से मुकर रही है। उन्होंने आग्रह किया है कि सरकार और मिल्कफेड आने वाले समय में पशुपालकों से 20 लीटर तय सीमा में दूध खरीद की नीति को लागू न करे। समय पर दूध भुगतान और पशु औषधालय में रिक्त पदों को भरें।