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छोटे उत्पादकों से दूध खरीदने की रहेगी प्राथमिकता : अध्यक्ष
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एक किसान से 20 लीटर से अधिक दूध न खरीदने पर बोले मिल्कफेड के अध्यक्ष बीएस ठाकुर
बाहरी राज्य से आ रहा दूध किया जाएगा बंद, डेयरी फॉर्म अपना प्रोडक्ट बेचने में है सक्षम
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। छोटे उतपादकों से दूध खरीदने की प्राथमिकता है। बाहरी राज्य से सोसायटियों में आ रहा दूध बंद किया जाएगा, क्योंकि डेयरी फॉर्म अपना प्रोडक्ट बेचने में सक्षम है। बुधवार को यह बात हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर ने एक दुग्ध उत्पादक से 20 लीटर से अधिक दूध न खरीदने संबंधी बयान के बाद कही। उनके बयान पर क्षेत्र में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इस पर अध्यक्ष ने पलटवार किया और कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य छोटे दुग्ध उत्पादकों और ग्रामीण महिलाओं को प्राथमिकता देना है ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विशेषकर मंडी जिले में बड़े पैमाने पर डेयरी फार्म स्थापित हो रहे हैं, जिनमें संचालक लाखों रुपये का निवेश कर अपने उत्पाद स्वयं तैयार करने में सक्षम हैं। ऐसे बड़े डेयरी संचालकों को भी सपोर्ट प्राइस दिया जाएगा, लेकिन मिल्कफेड की प्राथमिकता छोटे उत्पादकों से दूध खरीदने की रहेगी ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को इसका लाभ मिल सके। चेयरमैन ने ऊना स्थित चिलिंग प्लांट में पंजाब से प्रदेश की सोसायटियों में आ रहे दूध पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य प्रदेश के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करना है, न कि दूसरे राज्य की। इसे जल्द बंद करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे ताकि स्थानीय किसानों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाल ही में 150 नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाई गई हैं, लेकिन अभी तक इनसे दूध की खरीद शुरू नहीं हो पाई है। मिल्कफेड इन समितियों को जल्द जोड़ने और उनकी खरीद प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रयासरत है। चेयरमैन ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का स्पष्ट लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इसी दिशा में मिल्कफेड काम कर रहा है ताकि छोटे दुग्ध उत्पादकों को अधिक अवसर और बेहतर बाजार मिल सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। छोटे उतपादकों से दूध खरीदने की प्राथमिकता है। बाहरी राज्य से सोसायटियों में आ रहा दूध बंद किया जाएगा, क्योंकि डेयरी फॉर्म अपना प्रोडक्ट बेचने में सक्षम है। बुधवार को यह बात हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर ने एक दुग्ध उत्पादक से 20 लीटर से अधिक दूध न खरीदने संबंधी बयान के बाद कही। उनके बयान पर क्षेत्र में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इस पर अध्यक्ष ने पलटवार किया और कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य छोटे दुग्ध उत्पादकों और ग्रामीण महिलाओं को प्राथमिकता देना है ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विशेषकर मंडी जिले में बड़े पैमाने पर डेयरी फार्म स्थापित हो रहे हैं, जिनमें संचालक लाखों रुपये का निवेश कर अपने उत्पाद स्वयं तैयार करने में सक्षम हैं। ऐसे बड़े डेयरी संचालकों को भी सपोर्ट प्राइस दिया जाएगा, लेकिन मिल्कफेड की प्राथमिकता छोटे उत्पादकों से दूध खरीदने की रहेगी ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को इसका लाभ मिल सके। चेयरमैन ने ऊना स्थित चिलिंग प्लांट में पंजाब से प्रदेश की सोसायटियों में आ रहे दूध पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य प्रदेश के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करना है, न कि दूसरे राज्य की। इसे जल्द बंद करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे ताकि स्थानीय किसानों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाल ही में 150 नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाई गई हैं, लेकिन अभी तक इनसे दूध की खरीद शुरू नहीं हो पाई है। मिल्कफेड इन समितियों को जल्द जोड़ने और उनकी खरीद प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रयासरत है। चेयरमैन ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का स्पष्ट लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इसी दिशा में मिल्कफेड काम कर रहा है ताकि छोटे दुग्ध उत्पादकों को अधिक अवसर और बेहतर बाजार मिल सके।