{"_id":"6a674a2f3193fc02420c1ebc","slug":"gardeners-are-facing-the-brunt-of-chaos-in-parala-mandi-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1033-165776-2026-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: पराला मंडी में बागवान झेल रहे अव्यवस्था की मार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: पराला मंडी में बागवान झेल रहे अव्यवस्था की मार
विज्ञापन
पराला मंडी में ऑक्शन यार्ड में पेटियों के अनियोजित ढेर के बीच लगती बोली। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अभियान दो :
मंडी परिसर में अव्यवस्थित पार्किंग से लग रहा जाम, ऑक्शन यार्ड में सेब की पेटियों के अनियोजित ढेर
बागवानों ने शुल्क वृद्धि पर भी जताई चिंता, पड़ रहा आर्थिक बोझ
उचित प्रबंध नहीं हुए, तो स्थिति और जटिल होने की आशंका
पराला मंडी में बागवान झेल रहे अव्यवस्था की मार
पंकज गांगटा
कोटखाई (रोहड़ू)। प्रदेश की सबसे बड़ी फल मंडियों में शुमार पराला मंडी में सेब सीजन के दौरान बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थाओं ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। मंडी में रोजाना सेब लेकर पहुंचने वाले बागवान अव्यवस्था की मार झेल रहे हैं। मंडी परिसर में सेब की पेटियों के ऊंचे ढेर लगने से आवाजाही प्रभावित हो रही है। साथ ही बेतरतीब पार्किंग से जाम भी लग रहा है। समय रहते उचित प्रबंध नहीं हुए, तो स्थिति और जटिल होने की आशंका हैं। पराला फल मंडी के ऑक्शन यार्ड में सेब की पेटियों के अनियोजित ढेर लग रहे हैं। निजी वाहन भी बेतरतीब खड़े हो रहे हैं। इससे बागवानों, आढ़तियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बागवानों ने पिकअप वाहनों के एंट्री शुल्क में वृद्धि पर भी आपत्ति जताई है। पिछले वर्ष यह शुल्क 10 रुपये था, जो इस वर्ष 30 रुपये वसूला जा रहा है। इस बार सेब की फसल कम होने के कारण यह बढ़ा हुआ शुल्क छोटे और मध्यम बागवानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
पुलिस जवानों की तैनाती की जाए
बागवान सतीश चौहान, नरेश सामटा, कैलाश चौहान और राजेश चौहान ने बताया कि मंडी परिसर में सेब की पेटियों के ऊंचे ढेर लग रहे हैं। इससे आवाजाही बाधित हो रही है। ऑक्शन यार्ड में पेटियों का अनियोजित ढंग से ढेर लगाना भी एक समस्या है। निजी वाहनों की पार्किंग से भी जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने पुलिस जवानों की तैनाती की मांग की है। उन्होंने वाहनों की वैज्ञानिक पार्किंग और सुव्यवस्थित प्रवेश निकास व्यवस्था की भी बात कही। इससे जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
बागवानों ने पिकअप वाहनों के एंट्री शुल्क में वृद्धि पर नाराजगी व्यक्त की है। बागवानों का कहना है कि इस बार सेब की फसल अपेक्षाकृत कम है। कई पिकअप वाहन पूरी तरह नहीं भर पा रहे हैं। ऐसे में बढ़ा हुआ शुल्क छोटे और मध्यम बागवानों के लिए अतिरिक्त बोझ है। उन्होंने एपीएमसी से इस शुल्क को वापस लेने और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
विज्ञापन
प्रतिदिन 15 हजार पेटियां पहुंच रहीं
मंडी में प्रतिदिन लगभग 15 हजार सेब की पेटियां पहुंच रही हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंगलवार को मंडी में सेब का भाव 500 रुपये से 3,500 रुपये प्रति पेटी तक दर्ज किया गया।
हाल ही में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से शुल्क संशोधन का निर्णय लिया गया। इसके अनुसार, निजी वाहनों में सेब लेकर आने वाली पिकअप से 10 रुपये और टैक्सी श्रेणी के वाहनों से 30 रुपये एंट्री शुल्क लिया जा रहा है। बढ़ती आमद को देखते हुए मंडी प्रबंधन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।-- सचिन शर्मा, प्रभारी, पराला मंडी एपीएमसी
विज्ञापन
मंडी परिसर में अव्यवस्थित पार्किंग से लग रहा जाम, ऑक्शन यार्ड में सेब की पेटियों के अनियोजित ढेर
बागवानों ने शुल्क वृद्धि पर भी जताई चिंता, पड़ रहा आर्थिक बोझ
उचित प्रबंध नहीं हुए, तो स्थिति और जटिल होने की आशंका
पराला मंडी में बागवान झेल रहे अव्यवस्था की मार
पंकज गांगटा
कोटखाई (रोहड़ू)। प्रदेश की सबसे बड़ी फल मंडियों में शुमार पराला मंडी में सेब सीजन के दौरान बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थाओं ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। मंडी में रोजाना सेब लेकर पहुंचने वाले बागवान अव्यवस्था की मार झेल रहे हैं। मंडी परिसर में सेब की पेटियों के ऊंचे ढेर लगने से आवाजाही प्रभावित हो रही है। साथ ही बेतरतीब पार्किंग से जाम भी लग रहा है। समय रहते उचित प्रबंध नहीं हुए, तो स्थिति और जटिल होने की आशंका हैं। पराला फल मंडी के ऑक्शन यार्ड में सेब की पेटियों के अनियोजित ढेर लग रहे हैं। निजी वाहन भी बेतरतीब खड़े हो रहे हैं। इससे बागवानों, आढ़तियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बागवानों ने पिकअप वाहनों के एंट्री शुल्क में वृद्धि पर भी आपत्ति जताई है। पिछले वर्ष यह शुल्क 10 रुपये था, जो इस वर्ष 30 रुपये वसूला जा रहा है। इस बार सेब की फसल कम होने के कारण यह बढ़ा हुआ शुल्क छोटे और मध्यम बागवानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
पुलिस जवानों की तैनाती की जाए
बागवान सतीश चौहान, नरेश सामटा, कैलाश चौहान और राजेश चौहान ने बताया कि मंडी परिसर में सेब की पेटियों के ऊंचे ढेर लग रहे हैं। इससे आवाजाही बाधित हो रही है। ऑक्शन यार्ड में पेटियों का अनियोजित ढंग से ढेर लगाना भी एक समस्या है। निजी वाहनों की पार्किंग से भी जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने पुलिस जवानों की तैनाती की मांग की है। उन्होंने वाहनों की वैज्ञानिक पार्किंग और सुव्यवस्थित प्रवेश निकास व्यवस्था की भी बात कही। इससे जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
विज्ञापन
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
बागवानों ने पिकअप वाहनों के एंट्री शुल्क में वृद्धि पर नाराजगी व्यक्त की है। बागवानों का कहना है कि इस बार सेब की फसल अपेक्षाकृत कम है। कई पिकअप वाहन पूरी तरह नहीं भर पा रहे हैं। ऐसे में बढ़ा हुआ शुल्क छोटे और मध्यम बागवानों के लिए अतिरिक्त बोझ है। उन्होंने एपीएमसी से इस शुल्क को वापस लेने और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
विज्ञापन
प्रतिदिन 15 हजार पेटियां पहुंच रहीं
मंडी में प्रतिदिन लगभग 15 हजार सेब की पेटियां पहुंच रही हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंगलवार को मंडी में सेब का भाव 500 रुपये से 3,500 रुपये प्रति पेटी तक दर्ज किया गया।
हाल ही में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से शुल्क संशोधन का निर्णय लिया गया। इसके अनुसार, निजी वाहनों में सेब लेकर आने वाली पिकअप से 10 रुपये और टैक्सी श्रेणी के वाहनों से 30 रुपये एंट्री शुल्क लिया जा रहा है। बढ़ती आमद को देखते हुए मंडी प्रबंधन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

पराला मंडी में ऑक्शन यार्ड में पेटियों के अनियोजित ढेर के बीच लगती बोली। संवाद

पराला मंडी में ऑक्शन यार्ड में पेटियों के अनियोजित ढेर के बीच लगती बोली। संवाद

पराला मंडी में ऑक्शन यार्ड में पेटियों के अनियोजित ढेर के बीच लगती बोली। संवाद