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हिमाचल प्रदेश: 75-75 साल की दो महिलाओं ने खुद से कम उम्र के पतियों को छोड़ा, शिमला के ठियोग का मामला
प्रकाश ठाकुर, रामपुर बुशहर।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 30 Mar 2026 10:52 AM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला में 75-75 साल की दो महिलाओं ने खुद से कम उम्र के पतियों का साथ छोड़ अलग रहने का फैसला किया है। एक का पति 39 और दूसरी महिला का पति 59 साल का है। पढ़ें पूरी खबर...
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
शिमला जिले के उपमंडल ठियोग में 75-75 साल की दो महिलाओं ने खुद से कम उम्र के पतियों का साथ छोड़ अलग रहने का फैसला किया है। इन मामले में पति और पत्नी की ओर से संयुक्त याचिकाएं प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय शिमला में दायर की गई थीं। अदालत ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 39 और 59 साल के पतियों को तलाक देने को मंजूरी दी है।
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एक याचिका 75 साल की पत्नी और 59 साल के पति ने दायर की। याचिका में कहा गया है कि उनका विवाह वर्ष 1990 में हुआ। इस विवाह से कोई संतान नहीं हुई। साल 2010 से दोनों के बीच गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए। सम्मानित व्यक्तियों ने याचिकाकर्ताओं के बीच उत्पन्न विवाद को सुलझाने के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन उसे सुलझाया नहीं जा सका।
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दोनों ने सहमति व्यक्त की है कि उनके विवाह को भंग कर दिया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने यह याचिका दायर की है। दूसरी याचिका 75 साल की पत्नी और 39 साल के पति ने दायर की थी। याचिका में बताया कि उनका विवाह 2008 में हुआ था। उनके तीन बच्चे हैं। जून 2021 से उनमें पैदा हुए मतभेदों के कारण वे अलग-अलग रह रहे हैं। इस विवाद का समाधान नहीं हो सका। न्यायालय में दोनों ने स्पष्ट किया कि अब वैवाहिक संबंध जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं।
जांच-पड़ताल करने के उपरांत न्यायालय भी इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि दोनों पक्षों के बीच अब दोबारा मेल-मिलाप संभव नहीं है। गुजारा भत्ते का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। इस बात पर सहमति बनी है कि तीनों बच्चे पिता के साथ रहेंगे। पति बच्चों को मां से मिलने की अनुमति देगा।
तलाकशुदा पत्नी को रहने के लिए कमरा, रसोई और स्नानघर उपलब्ध करवाएगा पति
याचिका के समर्थन में दोनों पक्षों के शपथ पत्र प्रस्तुत किए, जिसमें 59 साल के पति व 75 साल की पत्नी ने स्पष्ट किया कि वे अब वैवाहिक संबंध जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं। इस बात पर भी सहमति बनी है कि पति अपनी पेंशन में से तलाकशुदा पत्नी को प्रति माह पांच हजार रुपये भरण-पोषण के रूप में देगा। उसके रहने के लिए एक कमरा, रसोई और स्नानघर भी उपलब्ध करवाएगा। जब भी वह बीमार पड़ेगी, तो उपचार के लिए आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा का खर्च भी वहन करना होगा।
याचिका के समर्थन में दोनों पक्षों के शपथ पत्र प्रस्तुत किए, जिसमें 59 साल के पति व 75 साल की पत्नी ने स्पष्ट किया कि वे अब वैवाहिक संबंध जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं। इस बात पर भी सहमति बनी है कि पति अपनी पेंशन में से तलाकशुदा पत्नी को प्रति माह पांच हजार रुपये भरण-पोषण के रूप में देगा। उसके रहने के लिए एक कमरा, रसोई और स्नानघर भी उपलब्ध करवाएगा। जब भी वह बीमार पड़ेगी, तो उपचार के लिए आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा का खर्च भी वहन करना होगा।