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हिमाचल प्रदेश: पत्नी ने दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का दर्ज करवाया झूठा केस, पति की तलाक याचिका मंजूर

प्रकाश ठाकुर, रामपुर बुशहर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 25 Feb 2026 10:03 AM IST
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सार

पत्नी के बुरे व्यवहार से तंग आकर ससुराल पक्ष ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बदले में पत्नी ने दहेज प्रताड़ना की झूठी एफआईआर दर्ज कराई। घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया और भी शिकायतें पुलिस में दी। क्या है पूरा मामला विस्तार से जानें...
 

Himachal Wife files false dowry harassment and domestic violence case husband divorce petition granted
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

शादी के मामले में पति या पत्नी के खिलाफ बार-बार आपराधिक केस फाइल करना क्रूरता माना जाएगा। यह टिप्पणी अतिरिक्त प्रिंसिपल फैमिली कोर्ट शिमला (ठियोग में कैंप) ने तलाक की याचिका की सुनवाई करते हुई की। इस मामले में अदालत में पत्नी की मानसिक क्रूरता साबित हुई। इसी के आधार पर अदालत ने पति की तलाक की याचिका को मंजूरी दी। याचिका कोटखाई उपमंडल के एक व्यक्ति ने दायर की थी। याचिका के अनुसार शादी के बाद चार महीने तक गांव में साथ रहे। फिर पत्नी ससुराल छोड़कर चली गई।

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पत्नी इस शर्त पर वापस आने के लिए तैयार हुई कि पति के साथ अलग रहेगी। इसके बाद वह तीन महीने तक पति के साथ रही। इसके बाद फिर चली गई। परिवार के मनाने के बाद वह लगभग एक महीने के लिए वापस आई, लेकिन फिर हमेशा के लिए चली गई। इस दौरान पति को कारोबार में भारी नुकसान हुआ। बीच में उसका दादी की मृत्यु हुई। कुछ समय बाद भाई की शादी भी हुई। इन स्थितियों में पत्नी ने सहयोग करने के बजाए ससुराल के लिए समस्याएं पैदा करना शुरू कर दिया। 

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पत्नी के बुरे व्यवहार से तंग आकर ससुराल पक्ष ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बदले में पत्नी ने दहेज प्रताड़ना की झूठी एफआईआर दर्ज कराई। घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया और भी शिकायतें पुलिस में दी। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी यानी याचिकाकर्ता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि पति और उसका परिवार उसके साथ बुरा व्यवहार करता था। आश्चर्यजनक रूप से पत्नी का यह भी दावा है कि वह पति के साथ रहना चाहती है। इसलिए पत्नी की दलीलें एक विरोधाभास है। 

अदालत को लगता है कि याचिकाकर्ता ने यह साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश किए हैं कि पत्नी ने उसके साथ क्रूरता की है। पति ने यह भी रिकॉर्ड पर साबित किया है कि उसने अपनी शादी के बाद अलग रहने की जगह का भी इंतजाम किया था। इन बातों से यह भी साबित होता है कि पत्नी का कभी भी पति के साथ रहने का इरादा नहीं था।

सरकार ने पदोन्नति वेतन वृद्धि मामले में दायर की अपील
हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले प्रमोशन इंक्रीमेंट के लाभों को देने वाले एकल जज के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर दी है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की ओर से दायर एलपीए पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। हालांकि मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले पर कोई अंतिम रोक नहीं लगाई है। अदालत ने राज्य सरकार बनाम सूर्या प्रभा मामले में सरकार की ओर से अपील दायर करने में हुई 176 दिनों की देरी को माफ कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। 
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