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Rampur Bushahar News: कार हादसे में दिव्यांग हुई महिला को 1.42 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2026 11:43 PM IST
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मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण किन्नौर ने बीमा कंपनी के खिलाफ सुनाया फैसला
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साल 2023 में किन्नौर के यांगपा में खाई में गिरी थी कार

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण किन्नौर ने कार में हादसे में दिव्यांग हुई महिला को 1.42 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण से यह फैसला बीमा कंपनी के खिलाफ सुनाया है। याचिका के अनुसार यह कार हादसा 29 जून 2023 में किन्नौर के यांगपा में हुआ था। हादसे के दिन याचिकाकर्ता रामपुर बुशहर सुशीला नेगी कार में सवार होकर वांगतू से क्राबा जा रही थी। वाहन को रवि सिंह चला रहा था। कार में तीन और महिलाएं भी सवार थीं। यांगपा-1 के पास कार करीब 100 मीटर खाई में जा गिरी। घायल (याचिकाकर्ता) को शुरू में पीएचसी टापरी ले जाया गया, जहां से उसे रामपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया। रामपुर से उसे आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया। बाद में चंडीगढ़ रेफर कर दिया, जहां उनकी सर्जरी हुई। याचिकाकर्ता पीजीआई चंडीगढ़ में 24 दिनों तक वेंटिलेशन सपोर्ट पर रही। उन्हें नियमित जांच और फिजियोथैरेपी की भी सलाह दी गई थी। याचिकाकर्ता ने सर्जरी, दवाओं, मेडिकल टेस्ट, विशेष आहार, फिजियोथैरेपी, अटेंडेंट और यात्रा खर्चों पर 15 लाख रुपये से अधिक खर्च किए। याचिकाकर्ता के अनुसार, वह 100 प्रतिशत दिव्यांग हो गई है। उन्हें हर समय एक अटेंडेंट की आवश्यकता है। यह भी तर्क दिया गया है कि याचिकाकर्ता ट्यूशन पढ़ा कर स्वरोजगार करती थी। वह प्रति माह 30 हजार रुपये कमाती थी। मामले में कार के मालिक, चालक और कार का बीमा करने वाली कंपनी को प्रतिवादी बनाया गया। कार मालिक और चालक ने संयुक्त जवाब दाखिल किया है। उन्होंने बताया कि चालक की कोई लापरवाही नहीं थी। यदि यह ट्रिब्यूनल इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि याचिकाकर्ता मुआवजे का हकदार है, तो दुर्घटना के समय कार का विधिवत बीमा था। बीमा कंपनी क्षतिपूर्ति देने के लिए बाध्य है। बीमा कंपनी ने एक अलग लिखित बयान दाखिल किया है। बीमा कंपनी ने यह आपत्ति उठाई है कि कार को बीमा पॉलिसी के नियमों और शर्तों के उल्लंघन में चलाया जा रहा था। न्यायाधिकरण ने फैसला दिया है कि बीमा कंपनी ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता के पास वर्तमान याचिका दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं है। निष्कर्षों के परिणामस्वरूप यह दावा याचिका लागत सहित स्वीकार की जाती है। याचिकाकर्ता को 1,42,47,237 रुपये का मुआवजा दिया जाता है, जिस पर याचिका दायर करने की तारीख से लेकर संपूर्ण मुआवजा राशि की प्राप्ति तक 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी देय होगा। टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड इस राशि की क्षतिपूर्ति करेगी।
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