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Rampur Bushahar News: टहनियों पर गुलाबी कलियों से खिली उम्मीद
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सेब के बगीचों में पिंकवड की शुरुआत
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। कुमारसैन क्षेत्र के सेब बहुल इलाकों में इन दिनों सेब के पेड़ों पर पिंकबड की शुरुआत हो गई है। बगीचों में पेड़ों की टहनियों पर गुलाबी कलियां खिलने लगी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का दृश्य मनमोहक हो गया है। लंबे समय बाद मौसम के साफ रहने से बागवानों के चेहरों पर उम्मीद की झलक देखने को मिल रही है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार पिंकबड सेब उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। इस दौरान फूल पूरी तरह खिलने से पहले गुलाबी अवस्था में होते हैं और यही समय परागण की दृष्टि से सबसे संवेदनशील माना जाता है। यदि इस समय मौसम अनुकूल रहे, तो अच्छी फल सेटिंग की संभावना बढ़ जाती है। कुछ वर्षों में इस चरण के दौरान बारिश, ओलावृष्टि या अत्यधिक ठंड ने फसल को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन इस बार मौसम साफ रहने से बागवान राहत महसूस कर रहे हैं। स्थानीय बागवानों का कहना है कि इस बार सर्दियों में पर्याप्त ठंड मिलने के बाद अब मौसम भी संतुलित बना हुआ है, जिससे पेड़ों में समान रूप से कलियां विकसित हो रही हैं। इससे इस साल बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। बागवानों ने बताया कि यदि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम इसी तरह साफ बना रहता है, तो फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बेहतर रह सकती हैं। स्थानीय बागवान राकेश कुमार, वेद और राजकुमार ने कहा कि एंटी-फ्रॉस्ट उपायों और स्प्रे शेड्यूल को नियमित रूप से अपनाया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने बागवानों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। पिंकबड के दौरान फफूंद नाशकों का संतुलित छिड़काव, मधुमक्खियों के संरक्षण और कीट प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। मधुमक्खियों की सक्रियता इस समय परागण के लिए अत्यंत आवश्यक होती है, इसलिए बागवानों को रासायनिक दवाओं के उपयोग में सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
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कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। कुमारसैन क्षेत्र के सेब बहुल इलाकों में इन दिनों सेब के पेड़ों पर पिंकबड की शुरुआत हो गई है। बगीचों में पेड़ों की टहनियों पर गुलाबी कलियां खिलने लगी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का दृश्य मनमोहक हो गया है। लंबे समय बाद मौसम के साफ रहने से बागवानों के चेहरों पर उम्मीद की झलक देखने को मिल रही है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार पिंकबड सेब उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। इस दौरान फूल पूरी तरह खिलने से पहले गुलाबी अवस्था में होते हैं और यही समय परागण की दृष्टि से सबसे संवेदनशील माना जाता है। यदि इस समय मौसम अनुकूल रहे, तो अच्छी फल सेटिंग की संभावना बढ़ जाती है। कुछ वर्षों में इस चरण के दौरान बारिश, ओलावृष्टि या अत्यधिक ठंड ने फसल को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन इस बार मौसम साफ रहने से बागवान राहत महसूस कर रहे हैं। स्थानीय बागवानों का कहना है कि इस बार सर्दियों में पर्याप्त ठंड मिलने के बाद अब मौसम भी संतुलित बना हुआ है, जिससे पेड़ों में समान रूप से कलियां विकसित हो रही हैं। इससे इस साल बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। बागवानों ने बताया कि यदि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम इसी तरह साफ बना रहता है, तो फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बेहतर रह सकती हैं। स्थानीय बागवान राकेश कुमार, वेद और राजकुमार ने कहा कि एंटी-फ्रॉस्ट उपायों और स्प्रे शेड्यूल को नियमित रूप से अपनाया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने बागवानों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। पिंकबड के दौरान फफूंद नाशकों का संतुलित छिड़काव, मधुमक्खियों के संरक्षण और कीट प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। मधुमक्खियों की सक्रियता इस समय परागण के लिए अत्यंत आवश्यक होती है, इसलिए बागवानों को रासायनिक दवाओं के उपयोग में सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।