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Rampur Bushahar News: अफसर गायब, खाली दफ्तर से दम तोड़ लौट रही फरियाद
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शुक्रवार को सुबह्र खाली पड़ा लोक निर्माण विभाग डोडरा क्वार का कार्यालय। संवाद
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लोगों की पुकार-कहां हो साहब, अब लौट आओ दफ्तर
दफ्तर से साहब गायब, ढूंढ रहे हैं लोग
ग्राउंड रिपोर्ट : डोडरा-क्वार में लोक निर्माण विभाग डिविजन में अधिकारियों के नदारद रहने से जनता परेशान
कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अलावा कोई मौजूद नहीं रहता
अधिशासी अभियंता का पद खाली, अन्य अधिकारी भी नियमित नहीं मिलते
रतन चौहान
रोहड़ू। कहां हो साहब, अब तो लौट आओ दफ्तर। यह हाल है प्रदेश के अति दुर्गम क्षेत्र डोडरा-क्वार की पांच पंचायतों की सुविधा के लिए बनाए गए लोक निर्माण विभाग के डिविजन कार्यालय का। प्रदेश सरकार ने दुर्गम क्षेत्र में पांच पंचायतों को बेहतर सड़क सुविधाएं देने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग का डिविजन तो खोल दिया, लेकिन दफ्तर से अफसर गायब रहते हैं। जब भी लोग अपने काम के लिए दफ्तर पहुंचते हैं, तो साहब के न मिलने पर फरियाद दम तोड़कर निराश लौट जाती है। हालात ये हैं कि पूरे कार्यालय में स्थानीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अलावा कोई अधिकारी मौजूद नहीं रहता। इससे न तो विकास कार्यों को गति मिल पा रही और न ही लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। क्वार निवासी प्रवीण कासटा, रोहित चौहान और जोशू गुदरवान ने रोष जताते हुए बताया कि ठेकेदारों के बिल पास करने और प्राक्कलन तैयार करवाने के काम इस कार्यालय से नहीं, बल्कि रोहड़ू से हो रहे रहे हैं। नवंबर से डोडरा-क्वार स्थित इस कार्यालय में न तो अधिशासी अभियंता है और न ही एसडीओ। कनिष्ठ अभियंता भी नियमित रूप से मौजूद नहीं मिलते हैं। लोगों का कहना है कि डोडरा-क्वार जैसे दुर्गम क्षेत्र में अधिकारी ही तैनात न हों, तो डिविजन खोलने का उद्देश्य ही बेकार है। स्थानीय युयाओं ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की मांग उठाई है ताकि लोगों को राहत मिल सके और विकास कार्य पटरी पर लौट सकें। इस साल कम हिमपात के बाद भी जनवरी से डोडरा-क्वार सड़क मार्ग केवल एक सप्ताह के लिए ही छोटे वाहनों के लिए बहाल हो पाया है। ऐसे में लोगों को आवाजाही के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपात स्थिति में मरीजों और जरूरतमंदों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। संवाद
अधिशासी अभियंता का पद फिलहाल खाली है। एसडीओ और जेई वहां तैनात तो हैं, लेकिन इन दिनों उन्हें कुछ कार्यों के लिए अन्य स्थानों पर बुलाया गया है। ऐसा नहीं है कि अधिकारी वहां नहीं रहते, बल्कि कुछ दिन पहले सड़क बहाल होने के दौरान वे मौके पर ही मौजूद थे और वहीं से काम कर रहे थे। कभी काम से शिमला भी जाना पड़ता है।-- -- प्रमोद कुमार उप्रेती, अधीक्षण अभियंता, लोक निमाण विभाग सर्किल रोहड़ू
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कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अलावा कोई मौजूद नहीं रहता
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रतन चौहान
रोहड़ू। कहां हो साहब, अब तो लौट आओ दफ्तर। यह हाल है प्रदेश के अति दुर्गम क्षेत्र डोडरा-क्वार की पांच पंचायतों की सुविधा के लिए बनाए गए लोक निर्माण विभाग के डिविजन कार्यालय का। प्रदेश सरकार ने दुर्गम क्षेत्र में पांच पंचायतों को बेहतर सड़क सुविधाएं देने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग का डिविजन तो खोल दिया, लेकिन दफ्तर से अफसर गायब रहते हैं। जब भी लोग अपने काम के लिए दफ्तर पहुंचते हैं, तो साहब के न मिलने पर फरियाद दम तोड़कर निराश लौट जाती है। हालात ये हैं कि पूरे कार्यालय में स्थानीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अलावा कोई अधिकारी मौजूद नहीं रहता। इससे न तो विकास कार्यों को गति मिल पा रही और न ही लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। क्वार निवासी प्रवीण कासटा, रोहित चौहान और जोशू गुदरवान ने रोष जताते हुए बताया कि ठेकेदारों के बिल पास करने और प्राक्कलन तैयार करवाने के काम इस कार्यालय से नहीं, बल्कि रोहड़ू से हो रहे रहे हैं। नवंबर से डोडरा-क्वार स्थित इस कार्यालय में न तो अधिशासी अभियंता है और न ही एसडीओ। कनिष्ठ अभियंता भी नियमित रूप से मौजूद नहीं मिलते हैं। लोगों का कहना है कि डोडरा-क्वार जैसे दुर्गम क्षेत्र में अधिकारी ही तैनात न हों, तो डिविजन खोलने का उद्देश्य ही बेकार है। स्थानीय युयाओं ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की मांग उठाई है ताकि लोगों को राहत मिल सके और विकास कार्य पटरी पर लौट सकें। इस साल कम हिमपात के बाद भी जनवरी से डोडरा-क्वार सड़क मार्ग केवल एक सप्ताह के लिए ही छोटे वाहनों के लिए बहाल हो पाया है। ऐसे में लोगों को आवाजाही के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपात स्थिति में मरीजों और जरूरतमंदों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। संवाद
अधिशासी अभियंता का पद फिलहाल खाली है। एसडीओ और जेई वहां तैनात तो हैं, लेकिन इन दिनों उन्हें कुछ कार्यों के लिए अन्य स्थानों पर बुलाया गया है। ऐसा नहीं है कि अधिकारी वहां नहीं रहते, बल्कि कुछ दिन पहले सड़क बहाल होने के दौरान वे मौके पर ही मौजूद थे और वहीं से काम कर रहे थे। कभी काम से शिमला भी जाना पड़ता है।
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